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मंडलीय एवं जिला महिला चिकित्सालय में बंद है अल्ट्रासाउंड

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मिर्जापुर। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल के संसदीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बुरी हालत है। आलम यह है कि मंडलीय चिकित्सालय में पिछले दो सालों से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है तो जिला महिला चिकित्सालय में पांच साल से अल्ट्रासाउंड और एक्सरे दोनों जांचें ठप हैं। रेडियोलॉजिस्ट के न होने से लाखों की मशीनें धूल फांक रहही हैं। साथ ही दोनों अस्पतालों से प्रतिदिन डेढ़ सौ से अधिक मरीज वापस लौटते हैं और पांच सौ से एक हजार रुपये खर्च कर जांच कराने को मजबूर हैैं। मामले की शिकायत केंद्रीय मंत्री, विधायक तथा डीएम से करने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं मुहैया कराने का दावा कर रही है। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल भी जनपद में सारी चिकित्सीय सुविधा होने की बात करती रहती हैं लेकिन यह सच नहीं है। जिला अस्पताल को मंडलीय चिकित्सालय का दर्जा मिला हुआ है। यहां मिर्जापुर के अलावा सोनभद्र एवं भदोही से दो हजार मरीज प्रतिदिन इलाज कराने आते हैं, लेकिन उन्हें जांच और दवाओं के लिए भटकना पड़ता है। सबसे जरूरी अल्ट्रासाउंड ही नहीं होता। पूछने पर बताया जाता है कि रेडियोलाजिस्ट नहीं है। दो बजे के बाद टिटनेस की सूई भी नहीं लगाई जाती। मरीज को बाहर से खरीदकर लाना पड़ता है। यही हाल जिला महिला चिकिसालय का है। यहां एक हजार से अधिक मरीज प्रतिदिन आती हैं। इनमें लगभग 300 महिलाएं गर्भवती होती हैं, जिन्हें एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह चिकित्सकों द्वारा दी जाती है लेकिन यहां दोनों जांच नहीं होतीं। उन्हें बाजार से महंगे दामों पर जांच कराना पड़ता है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अस्पताल के जो मरीज बाजार में जांच कराते हैं, उसका कमीशन चिकित्सकों को मिलता है।
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