मेरठ। शहर में युवा अब सेना की वर्दी से मिलती जुलती कारगो जींस और टीशर्ट जैसे परिधान नहीं पहन सकेंगे। सेना भर्ती की तैयारी और जिम में कसरत करने वाले ज्यादातर युवा ऐसे परिधान पहनते रहे हैं। इसे पेटेंट राइट की चोरी मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। छावनी क्षेत्र में सुरक्षा और वर्दी का दुरुपयाेग को रोकने लिए सेना (रक्षा मंत्रालय) की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। सेना ने पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर इस बारे में अवगत कराया है।
शहर में 150 से अधिक निर्माताओं और व्यापारियों की ओर से सेना की वर्दी जैसे परिधान बेचे जाते हैं। अब सेना की नई वर्दी (डिजिटल कैमोफ्लाईज पैटर्न कॉम्बैट यूनिफोर्म) से मिलती-जुलती कारगो, जींस, टीशर्ट और शर्ट बाजारों में नहीं बेचीं जाएंगी। सदर, लालकुर्ती, बुढ़ाना गेट और वैली बाजार में सेना के साथ पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की वर्दी जैसे परिधानों की कई दुकानें हैं। इन व्यापारियों का सालाना कारोबार पांच करोड़ रुपये से अधिक है। सैन्य सूत्रों के अनुसार सेना डिजाइन ब्यूरो रक्षा मंत्रालय सेना भवन नई दिल्ली ही नई कैमोफ्लाईज डिजिटल पैटर्न एवं डिजाइन के लिए अधिकृत है।
सेना ने इस संबंध में आदेश जारी किया है कि छावनी या शहर में अगर कोई भी वर्दी निर्माता या विक्रेता इस डिजाइन को मनमाने ढंग से बनाता या बेचता पाया गया तो उसपर कॉपीराइट का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।
शहर में कोई नहीं है अधिकृत वर्दी विक्रेता
- सैन्य सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर और छावनी में सेना की वर्दी बेचने के लिए कोई अधिकृत विक्रेता नहीं हैं। सैन्य कर्मियों को सीएसडी कैंटीन के माध्यम से यह वर्दी दी जाएगी। सैन्य अधिकारियों ने जिलाधिकारी, छावनी परिषद और पुलिस अधिकारियों को रक्षा मंत्रालय के आदेश के बारे में जानकारी भेज दी गई है।