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विश्व नदी दिवस: केवल फाइलों में निर्मल हो रही काली, अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी अभियान में हुए थे शामिल

Sun, 25 Sep 2022 11:35 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

सितंबर के चौथे रविवार को विश्व नदी दिवस मनाया जाता है। नदियों की सफाई आदि के लिए कई अभियान तक चलाए जाते हैं, लेकिन अधिकारियों को ये बिल्कुल याद नहीं रहता। नदी की सफाई का कार्य केवल फाइलों तक ही सीमित है। 
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काली नदी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काली नदी को निर्मल करने का कार्य सिर्फ फाइलों में होता दिखाई दे रहा है। विश्व नदी दिवस पर भी प्रशासन को नदी की याद नहीं आई। नदियों में गंदा पानी गिरने का मुद्दा लोकसभा और विधानसभा में भी गूंज चुका है। सैकड़ों लोग इसके कारण फैली बीमारी से अपनी जान तक गंवा चुके हैं। 

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हर साल सितंबर के चौथे रविवार को विश्व नदी दिवस मनाया जाता है। नदियों की सफाई आदि के लिए कई अभियान तक चलाए जाते हैं, लेकिन जिले के अधिकारी इस दिन को भूले बैठे हैं। मेरठ से होकर निकलने वाली काली नदी का बुरा हाल है। इसकी सफाई के लिए तमाम अभियान चलाए गए, लेकिन इसका नतीजा आज तक नहीं निकल पाया है। नदी की सफाई का कार्य फाइलों तक सीमित है। 

मुजफ्फरनगर जिले के अंतवाड़ा गांव से काली नदी का उद्गम हुआ था। उसके बाद मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, एटा, फर्रुखाबाद होते हुए यह नदी कन्नौज में गंगा में जाकर मिलती है। मेरठ में करीब 40 किमी क्षेत्र में इस नदी का प्रवाह है। इस बीच न जाने कितने नालों और फैक्ट्रियों का दूषित पानी इस नदी में गिरता है। इसके दूषित पानी के कारण मेरठ के आस पास के कई गांवों में पीने का पानी तक खराब हो चुका है।
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कई गांवों में लोगों को इस कारण कैंसर तक हो चुका है और अपनी जान गंवा चुके हैं। मेरठ में ही तीन नालों का पानी इस नदी में गिरता है। इसके लिए भी प्रशासन की ओर से अभी तक कुछ नहीं किया गया। नालों का पानी साफ करने के लिए यहां काली नदी के पास ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाना था जिसका कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है। 

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वर्ष 2021 में चला था अभियान
जून 2021 में जिला प्रशासन की ओर से किला परीक्षितगढ़ रोड पर स्थित गांवड़ी गांव से नदी की सफाई को लेकर अभियान चलाया गया था। नदी के दोनों ओर सफाई कर यहां पौधे लगाए गए थे। फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी कार्यक्रम में पहुंचे थे, लेकिन इस साल प्रशासन भी इस अभियान को भूल चुका है। गांवड़ी गांव में जहां पौधे लगाए थे वहां से ही नदी लुप्त हो चुकी है। 

लोकसभा और विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
लोकसभा में सांसद राजेंद्र अग्रवाल की ओर से भी यह मुद्दा उठाया जा चुका है। उनके द्वारा एसटीपी प्लांट लगाए जाने के विषय को उठाया गया था जो अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। उधर सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान की ओर से काली नदी के मुद्दे को अभी हाल ही में विधानसभा में भी उठाया गया था। उन्होंने इस नदी के कारण होने वाले प्रदूषण और इसके कारण कई गांवों में फैली बीमारी के बारे में विस्तार से पूरी जानकारी विधानसभा में रखी थी। बावजूद इसके नदी के हालातों में सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

800 क्यूसेक पानी की कर रहे व्यवस्था
हमने तीन चैक डेम का प्रस्ताव सिंचाई विभाग को भेजा था। एक चेक डैम 40-45 लाख रुपये की लागत से तैयार होता है। हमारी कोशिश है कि मुजफ्फरनगर के कैनाल से 800 क्यूसेक पानी आ जाए तो काली नदी लबालब हो जाएगी। जब तक पानी नहीं चलेगा तो दिक्कत रहेगी। इसके लिए हम सरधना के नंगली गांव में चिह्नीकरण भी कर रहे हैं। - शशांक चौधरी, मुख्य विकास अधिकारी, मेरठ
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