प्रशासन ने 7539 बेसहारा गोवंश को गोशालाओं में संरक्षित करने का दावा किया है। हालांकि शहर और देहात में अब भी दो हजार से भी अधिक बेसहारा गोवंश विचरते हुए बताए जा रहे हैं। प्रत्येक किसान दिवस में किसान अधिकारियों के सामने बेसहारा गोवंश के माध्यम से फसलों को हो रहे नुकसान की बात बताते हैं।
बेसहारा गोवंश की चपेट में आने से कई लोग घायल हो चुके हैं। एक युवक की तो जान तक चली गई। सरकारी गोशालाओं में बेसहारा गोवंश के उपचार और चारे आदि की व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अखिलेश गर्ग का कहना है कि 2024 तक कोई बेसहारा गोवंश सड़क व खेतों में नहीं दिखाई देगा क्योंकि देशी गायों को बछिया ही पैदा करने की तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
गोवंश के लिए गोशालाओं का विस्तार और नई गोशालाएं बनाई जा रही हैं। काफी पशुपालक ऐसे हैं जो दूध देना बंद करने पर गोवंश को बेसहारा छोड़ रहे हैं। ऐसे लोगों को भी गोवंश की उपयोगिता समझनी चाहिए।