पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर केंद्रीय विधि मंत्री सदानंद गौड़ा के बयान पर केंद्रीय संघर्ष समिति ने नाराजगी जताई है। समिति के आह्वान पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सोमवार को अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहे। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन रोहिताश्व कुमार अग्रवाल और संयोजक संजय शर्मा ने इस दौरान कहा कि केंद्रीय विधि मंत्री का बयान गैर जिम्मेदारान है। कानून के हिसाब से हाईकोर्ट बेंच के लिए किसी भी प्रस्ताव की कोई आवश्यकता नहीं है। बेंच की स्थापना बिना प्रस्ताव के संसद द्वारा की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले प्रेस क्लब दिल्ली में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पश्चिम के सभी सांसदों और मंत्रियों को तमाम विधि विशेषज्ञों ने अवगत कराया था कि स्टेट री ऑर्गेनाइजेशन एक्ट 1956 के तहत उत्तर प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए यूपी सरकार या हाईकोर्ट से किसी भी प्रस्ताव की कोई आवश्यकता नहीं है।
बेंच की स्थापना संसद द्वारा की जा सकती है। इसके बाद भी केंद्रीय विधि मंत्री ने हाईकोर्ट इलाहाबाद की 150 वीं वर्षगांठ के मौके पर पउप्र में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए किसी भी प्रस्ताव के न होने की बात कही। अधिवक्ताओं ने कहा कि देश के विधि मंत्री को बिना कानून की जानकारी लिए कोई भी ऐसा बयान नहीं देना चाहिए, जो कानून के विपरीत हो।