मेरठ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 99 वर्ष शनिवार को विजयदशमी पर पूरे हो गए। इसके साथ ही संघ की स्थापना का शताब्दी वर्ष शुरू हो गया। विजयदशमी पर मेरठ के पूर्वी और पश्चिमी महानगरों में 32 स्थानों पर लगभग छह हजार स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में पथ संचलन किया। सभी स्थानों पर शस्त्र पूजन किया गया। घर-घर जाकर स्वयंसेवकों द्वारा भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
शास्त्रीनगर, जागृति विहार, सूरजकुंड पार्क, मंगलपांडे नगर, गंगानगर, लालकुर्ती, पल्लवपुरम, कंकरखेड़ा, मलियाना ब्रह्मपुरी, सरस्वती लोक, मलियाना, शारदा रोड, अब्दुल्लापुर आदि स्थानों पर पथ संचलन निकला और शस्त्र पूजन किया गया। पथ संचलन करते स्वयंसेवकों पर लोगों द्वारा पुष्पवर्षा की गई। जागृति विहार में क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख रूपनारायण ने कहा कि आरएसएस वर्ष में छह उत्सव मनाता है। विजय दशमी को भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। श्रीराम वन में गए, यह उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण योजना का हिस्सा था। वे राजा बन सकते थे, लेकिन जब समाज संकट में हो तो सुख का भोग करना निरर्थक हो जाता है। उन्होंने समाज से वंचित बंधुओं, भालू और वानरों को संगठित करके रावण का वध किया। पांडवों ने भी शस्त्रों का पूजन किया था। हिन्दू समाज को अपने घर में शस्त्र पूजन अवश्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज विश्व में सबसे बड़ा संगठन आरएसएस है। संघ को जानने के लिए शाखा में आना पड़ता है। तभी संघ को सही तरीके से जाना जा सकता है। प्रारंभ में संघ पर प्रतिबंध लगे, लेकिन आज समाज ने संघ को स्वीकार किया है। शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाना है। विभिन्न कार्यक्रमों में सह प्रांत प्रचारक विनोद कुमार, प्रांत प्रचार प्रमुख सुरेंद्र सिंह, सह प्रांत संपर्क प्रमुख वेदपाल, सह विभाग संघचालक विनोद भारतीय, विभाग शारीरिक प्रमुख मनोज कुमार, संजीव गर्ग, सुनील कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।