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Meerut News: रबी सीजन में संतुलित उर्वरक के उपयोग से बढ़ेगा फसल उत्पादन

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मेरठ। रबी फसलों का सीजन शुरू होते ही कृषि विभाग किसानों को संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दे रहा है। किसानों को बताया जा रहा है कि उर्वरक की अधिकता से फसलों की उपज को नुकसान होता है। सही उपज पाने के लिए वैज्ञानिक संस्तुति के आधार पर खेतों में उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए।
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धान के खेत खाली होते ही किसानों ने रबी की फसलों की बुआई शुरू कर दी है। इसमें किसान गेहूं, आलू, सरसों, अगेती गन्ने आदि की बुआई में जुटे हैं। जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि किसान अपनी फसलों में डीएपी का प्रयोग फास्फोरस के लिए करते हैं, जबकि फास्फोरस एनपीके (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम) एवं एसएसपी (सिंगल सुपर फास्फेट) में उपलब्ध रहता है। एनपीके में फास्फोरस के साथ पोटाश भी उपलब्ध रहता है। एसएसपी में फास्फोरस के साथ-साथ कैल्शियम एवं सल्फर भी है। इस प्रकार कैल्शियम और सल्फर अलग से फसल को देने की आवश्यकता नहीं होती।
गेहूं के सीजन के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में उर्वरक का आवंटन किया गया है। उसे पहले से ही खरीदकर अपने पास जमा न करें। वैज्ञानिक संस्तुति के अनुसार आलू में डीएपी 15 किलोग्राम प्रति बीघा तथा एनपीके 20 किलोग्राम प्रति बीघा डालना चाहिए। गेहूं की बुआई के 21 दिन बाद सिंचाई और उसके बाद उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए।
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