भ्रष्टाचार के आरोप में उत्तर प्रदेश के पूर्व पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री अवधपाल सिंह यादव के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए न्यायालय विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रमोद कुमार गंगवार ने तलब किया है। विवेचक ने इस मामले में अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल की थी।
विज्ञापन
न्यायालय ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्य को संज्ञान में लेते हुए अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर भ्रष्टाचार के प्रकरण को स्टेट केस के रूप में दर्ज कर अवधपाल सिंह यादव को 409‚ 420‚ 120बी आईपीसी तथा 13-1-डी सपठित धारा-13-2 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे के विचारण के लिए तलब किया है।
उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान आगरा के निरीक्षक वादी अभय सिंह ने एक प्रार्थना पत्र मुकदमा दर्ज किए जाने के लिए दिया था। प्रकरण में हाईकोर्ट लखनऊ के अधिवक्ता डॉ. सुबोध यादव निवासी विजय खंड गोमतीनगर लखनऊ की शिकायत पर न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा लोकायुक्त उत्तर प्रदेश ने संज्ञान लेते हुए शासन को जांच के लिए शिकायत प्रेषित की थी।
शिकायत में उल्लेखित किया गया था कि तत्कालीन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार पशुधन एवं दुग्ध विकास उत्तर प्रदेश लखनऊ अवधपाल सिंह यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने पुत्र ठेकेदार रणजीत सिंह यादव को फायदा करवाया था।
इनके विरुद्ध मुकदमा चलाने का निर्णय विभाग द्वारा अधिष्ठान द्वारा लिया गया था। इस मामले में तत्कालीन गवर्नर राम नाइक द्वारा 23 फरवरी 2018 को अवधपाल सिंह के विरोध अभियोजन की अनुमति दी थी। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आए कि अवधपाल सिंह के मंत्री कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश में कुल 16 स्थान पर नए पशु चिकित्सालय की स्थापना की गई थी। जिसमें अवधपाल सिंह के पुत्र रणजीत सिंह यादव को भी निर्माण किए जाने की अनुमति दी गई। निर्माण कार्य में प्रयोग की गई सामग्री अच्छी गुणवत्ता की नहीं थी।
मौके पर प्रयोग किए गए दरवाजों में दीमक लगी थी। दीवारों में नमी थी। बड़ी-बड़ी घास खड़ी हुई थी। कार्य किए जाने के लिए 25 लाख 81 हजार 959 रुपये का भुगतान अवधपाल सिंह के बेटे रणजीत सिंह यादव को किया गया। न्यायालय ने इस प्रकरण को स्टेट केस के रूप में दर्ज कर विशेष लोक अभियोजक को सूचित करने के आदेश देते हुए पत्रावली 30 अक्तूबर 2024 में सुनवाई के लिए नियत की है।