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UP Election 2022: 'सरधना' वाले पूछ रहे 'क्यूं नाराज हैं टिकैत साहब', खुशहाल तो जाट भी बहुत हैं...

सार

गन्ना किसान आदेश चौहान कहते हैं, देखिए जी, हमें तो टिकैत साहब का मालूम नहीं है कि वे क्यूं नाराज हैं। पता नहीं, उन्हें क्या लग रहा है। खुशहाल तो जाट भी बहुत हैं। जमीन तो जाटों के पास भी अच्छी है। वे बढ़िया पैदावार ले रहे हैं। इसके बावजूद राकेश टिकैत सरकार से नाराज हैं।
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सरधना के लोगों की राय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 'सरधना' विधानसभा सीट पर तगड़ा मुकाबला है। खास बात यह है कि आसपास की सीटों पर गन्ना किसानों की तादाद काफी ज्यादा है, जो सरकार से खुश नहीं बताए जा रहे हैं। हालांकि, सरधना क्षेत्र में हालात एकदम उलट हैं। कई किसानों का कहना है कि गन्ने की भुगतान को लेकर बेहद खुश हैं। भले ही उन्हें दो सप्ताह में भुगतान न मिल रहा हो, लेकिन पिछला भुगतान समय पर आ रहा है। गांव मदारपुरा के आदेश चौहान अपने खेत से गन्ने लेकर मिल जाने की तैयारी कर रहे थे। अमर उजाला की टीम उनके खेत पर पहुंची तो चौहान ने कहा, देखिए गन्ना किसानों की कोई बड़ी दिक्कत नहीं होती है। बीज में कुछ कमी आ जाती है। सरकार को उस तरफ ध्यान देना चाहिए। पैदावार अच्छी है। 'क्यूं नाराज हैं टिकैत साहब', खुशहाल तो जाट भी बहुत हैं, पैदावार भी अच्छी ले रहे हैं।' गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 'खास' और फायरब्रांड नेता संगीत सोम सरधना विधानसभा सीट पर हैट्रिक लगाने के इरादे से चुनावी मैदान में उतरे हैं। उनके सामने सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी अतुल प्रधान हैं। 

सरकार को दूर करना होगा यह 'रोग'

आदेश चौहान बताते हैं कि 14 जनवरी तक का भुगतान आ चुका है। इतना तो ठीक ही है। गन्ने के बीज में रोग ज्यादा है। खर्चा ज्यादा हो रहा है। उम्मीद है कि नई बुआई में सब ठीक हो जाएगा। सरकार ठीक काम कर रही है। दूसरी 'मिलों' की तुलना में हमारी 'दोराला मिल' बहुत जल्दी भुगतान कर रही है। बता दें कि आसपास के सभी इलाकों के किसानों ने गन्ने के भुगतान को लेकर काफी शिकायत की हैं।  

टिकैत साहब पता नहीं क्यूं नाराज हैं...

गन्ना किसान आदेश चौहान कहते हैं, देखिए जी, हमें तो टिकैत साहब का मालूम नहीं है कि वे क्यूं नाराज हैं। पता नहीं, उन्हें क्या लग रहा है। खुशहाल तो जाट भी बहुत हैं। जमीन तो जाटों के पास भी अच्छी है। वे बढ़िया पैदावार ले रहे हैं। इसके बावजूद राकेश टिकैत सरकार से नाराज हैं। सरधना के मशहूर चर्च के सामने कई ग्रामीण बैठे थे। इनमें शामिल जहीर खान ने कारोबार में मंदी को मुख्य चुनावी मुद्दा बताया। उनका कहना था कि जब कामकाज नहीं होगा तो सबकुछ ठीक कैसे होगा? उनके साथ बैठे निजामुद्दीन ने कहा कि इस बार मुकाबला सिर्फ भाजपा-सपा के बीच है। महंगाई सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। सरधना में भी सपा और भाजपा की टक्कर है। बाकी कोई नहीं है। 

राहुल-प्रियंका पार लगा सकते हैं कांग्रेस की नैया

सरधना के अब्दुल खालिक और निजामुद्दीन कहते हैं कि कभी यहां कांग्रेस का राज था। यह समय-समय की बात है। कांग्रेस थी तो चली आ रही थी। इंदिरा तक सब ठीक था। नेता अब अदल-बदल में लग गए। उनके बाद मामला बिगड़ गया। उम्मीद है कि राहुल और प्रियंका कांग्रेस की नैया पार लगा सकते हैं। चर्च के सामने बैठीं महिलाओं का कहना था कि अगर प्रियंका को मौका मिले तो वह पांच बार प्रधानमंत्री बन सकती हैं। मौका मिलेगा, तभी पता चलेगा। उसे मौका दिया जाना चाहिए। गठबंधन की सरकार काम नहीं कर पाती है।

कांग्रेस आईसीयू में तो बसपा को अस्पताल भी नहीं... 

इस दौरान काफी लोग ऐसे भी मिले, जिन्होंने कहा कि सरधना में तो कांग्रेस आईसीयू पर पड़ी है और बसपा को अस्पताल भी नसीब नहीं हो रहा है। लोगों का कहना है कि इस चुनाव में इन दोनों राजनीतिक दलों पर किसी को ज्यादा भरोसा नहीं है। लोहे की पट्टी घिस रहे सलाउद्दीन कहते हैं कि सब विकास के मुद्दे पर वोट करेंगे। जो हमारे विकास की बात करेगा, उसकी जीत होगी। पार्टी कोई भी हो। भाईचारा आज भी है। हिंदू-मुस्लिम में भेदभाव नहीं है। बता दें कि सरधना विधानसभा सीट पर बसपा ने संजीव धाना और कांग्रेस पार्टी ने रिहानुद्दीन को टिकट दिया है।

लोग घरों में, हम खेतों में सो रहे...

सरधना के किसान आवारा पशुओं से बेहद परेशान हैं। युवा किसान कहते हैं कि गायों ने लोगों की फसलें नष्ट कर दीं। लोग अपने घरों में सोते हैं और हमें खेतों में सोना पड़ता है। गन्ने से लदी बुग्गी लेकर मिल की तरफ जा रहे किसान चौधरी कहते हैं कि भुगतान को लेकर कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन थोड़े पैसे बढ़ जाते तो बात बन जाती। उन्होंने कहा कि 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे ही अब सरधना की पहचान बन गए हैं, जो गलत है।

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