मेरठ। शारदा रोड विश्व श्रमण संस्कृति श्रीसंघ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भक्तामर स्त्रोत की महिमा बताई गई। शिविर में सौरभ जैन प्रशिक्षण दिया। देवेंद्र जैन, अतुल जैन, वैभव जैन प्रक्षाल की क्रियाएं कराई। गौरव जैन पूजन विधि बताई। सौरभ जैन सराफ ने बच्चों को बताया कि भक्तामर स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंग द्वारा तब की गई थी, जब राजा भोज ने उन्हें 48 तालों के अंदर बंद करवा दिया था। तब आचार्य ने आदिनाथ भगवान की महिमा का वर्णन एक स्तुति के रूप में किया। प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य वरुण जैन, विनीता जैन को प्राप्त हुआ। ड्रा से पुरस्कार निकाले गए। सौरभ जैन ने बताया कि अगला शिविर 21 सितंबर को लगाया जाएगा। ब्यूरो