खरखौदा/मेरठ। कांशीराम कॉलोनी में तीन माह की बच्ची की बीमारी से मौत हो गई। बच्ची की मां ने उसे रात्रि में डिवाइडर के बीच में मिट्टी में दफना दिया। रविवार सुबह जब वहां बच्ची के कपड़े व अन्य सामान देखा तो कॉलोनी के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पोस्टमार्टम के बाद शव को दूसरी जगह पर दफनाया गया।
दरअसल, कांशीराम कॉलोनी में रविवार सुबह टेंपो स्टैंड के पास डिवाइडर के बीच में बच्ची के कपड़े पड़े दिखाई दिए। थोड़ी दूर मिट्टी भी खोदी गई थी। पता चलते ही वहां पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने आशंका जताई कि गड्ढे में किसी बच्चे का शव दबा हो सकता है। इसके बाद पुलिस पहुंची और तहसीलदार रामेश्वर प्रसाद भी पहुंच गए। तहसीलदार की मौजूदगी में मिट्टी हटाई गई तो वहां पर एक बच्ची का शव दबा मिला। बच्ची करीब तीन माह की थी।
पुलिस ने छानबीन की तो सामने आया कि यह बच्ची नैना पत्नी बबलू की है, जो मूलरूप से परीक्षितगढ़ के अमरसिंहपुर गांव की रहने वाली है। वह अपने पति से अलग कांशीराम कॉलोनी में किराए पर रहती हैं। पुलिस ने महिला को मौके पर बुलाया और पूछताछ की। महिला ने बताया कि बच्ची कई दिन से बीमार थी। शनिवार रात बीमारी के कारण उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद शव को डिवाइडर के बीच में खोदी गई मिट्टी में दबा दिया था।
दिनभर होती रही चर्चा
- इस घटना के दौरान लोगों में कई तरह की चर्चाएं रहीं। कुछ लोगों का कहना था कि यदि बच्ची बीमार थी और उसकी मौत हो गई थी तो महिला ने बच्ची के शव को काजीपुर में कंपोजिट विद्यालय के पीछे बच्चों के श्मशान घाट में क्यों नहीं दफनाया।
बीमारी से हुई थी मौत : एसपी देहात
एसपी देहात कमलेश बहादुर ने बताया कि बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टम में पता चला कि बीमारी के कारण बच्ची की मौत हुई थी। इसके बाद उसकी मां ने शव को वहां पर दफना दिया था। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।