मेरठ। लोहियानगर एम-पॉकेट स्थित अवैध पटाखा फैक्टरी में 100 किग्रा से ज्यादा पोटेशियम क्लोरेट रखा था। इसकी वजह से ही वहां भीषण विस्फोट हुआ था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है। इस खतरनाक विस्फोटक से टॉय गन के शॉट बनाए जा रहे थे। यदि फैक्टरी में और मजदूर होते तो उनकी भी जान जा सकती थी। बैलेस्टिक और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है।
लोहियानगर के एम पॉकेट के रिहायशी इलाके में शास्त्रीनगर सेक्टर चार निवासी संजय गुप्ता की दो मंजिला बिल्डिंग थी। बिल्डिंग की पहली मंजिल शास्त्रीनगर सेक्टर तीन निवासी आलोक रस्तोगी और उदयराज ने किराए पर ले रखी थी। दूसरी मंजिल जागृति विहार सेक्टर सात निवासी गौरव गुप्ता को दी हुई थी। पहली मंजिल पर आलोक रस्तोगी ने साबुन का गोदाम बनाया हुआ था। उदयराज ने प्रिटिंग मशीन की मरम्मत का काम किया हुआ था। दूसरी मंजिल पर गौरव गुप्ता ने अवैध पटाखा गोदाम संचालित किया हुआ था। इसमें टॉय गन के शॉट और स्काई बम थे। 17 सितंबर की सुबह आधा दर्जन मजदूर फैक्टरी में थे। सुबह सवा सात बजे अचानक भीषण विस्फोट हो गया। विस्फोट इतना भयावह था कि मजदूर कई मीटर दूर जाकर गिरे। वे बुरी तरह झुलस गए। धमाके से 33 केवी लाइन के खंभे टूट गए थे। हादसे में बिहार निवासी मजदूर प्रयाग साह, चंदन, सुनील, अयोध्या राम, रूपन साह की मौत हो गई थी। मौके पर पटाखे मिलने के बावजूद पुलिस ने इस मामले विस्फोटक अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई नहीं की। बिल्डिंग मालिक संजय गुप्ता और गौरव गुप्ता पर गैर इरादतन हत्या, 7 क्रिमनल एक्ट और दूसरी धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की। गौरव गुप्ता को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बिल्डिंग का मलिक संजय गुप्ता अभी फरार है। एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने बताया कि पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि गौरव गुप्ता ने टॉय गन के शॉट बनाने के लिए 100 किग्रा से अधिक पोटेशियम क्लोरेट खरीदा था। पुलिस की जांच अभी जारी है।