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Meerut News: जिले की ऐतिहासिक और पौराणिक जगहों की बदलेगी तस्वीर

Wed, 20 Dec 2023 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
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मंडावर क्षेत्र में ​स्थित गलखा देवी मंदिर।
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- स्थलों का विकास कराने के लिए तैयार किया जा रहा प्रस्ताव
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- विदुरकुटी, कण्व आश्रम और पारसनाथ के लिए मिल चुका है बजट
बिजनौर। बिजनौर की धरती पर भारत की प्राचीन संस्कृति की झलक को बयां करने वाले पौराणिक स्थलों की भरमार है। रामायण में इस धरती का जिक्र उतरापथ के तौर पर किया गया, महाभारत काल में भी जुड़ाव रहा। किला मोरध्वज हो या फिर विदुरकुटी पौराणिकता का प्रमाण देती हैं। अब पौराणिक और ऐतिहासिक जगहों की सूरत बदलने जा रही है। इनके विकास का खाका तैयार किया जा रहा है। तीन स्थलों के लिए बजट भी मिल चुका है बाकी का प्रस्ताव बन रहा है।


मेनका ताल : अभिज्ञान शाकुंतलम में जिक्र है कि मालन के तट पर कण्व आश्रम है। मंडावर के गांव मोहंडिया वाली जगह पर ही पहली बार दुष्यंत और शकुंतला का मिलन हुआ। इसलिए पहले यह बस्ती मोहदिया कहलाती थी, यहां आज भी शकुंतला की मां मेनका के नाम पर एक ताल है। इसी ताल में शकुंतला की अंगूठी गिरी थी।
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मां गलखा मंदिर : गंगा किनारे कुंदनपुर टीप के पास गलखा देवी मंदिर है। बताया जाता है कि इसी मंदिर से भगवान कृष्ण रुकमणी का हरण करके ले गए थे। लोग कहते हैं कि पुराणों में जिस कुंडीनपुर का जिक्र आता है, वह अब का कुंदनपुर गांव है। रुकमणी कुंडीनपुर की ही रहने वालीं थीं, इस स्थान के पास खुदाई में कुषाण काल की तीन मोहरें मिली थीं। इसी गलखा क्षेत्र को भीष्म के राज्य के साथ भी जोड़ा जाता है।


- जामा मस्जिद मंडावर : मंडावर में शमशुद्दीन इल्तुतमिश द्वारा बनवाई गई मस्जिद है। जोकि 822 साल पुरानी है। यह स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण है। मंडावर में प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वनेसांग छह महीने रहा था। प्राचीन काल में मंडावर को मतीपुरा भी कहा जाता था।


गुरुद्वारा बाग साहिब : हल्दौर में गुरु नानक देव ने पांच सौ साल पहले पहुंचकर धर्म प्रचार किया था। उस वक्त हल्दौर के राजा कमल नारायण राणा ने गुरु नानक देव की वाणी सुनी थी, प्रभावित होकर एक बड़ा बाग गुरुद्वारे को दान कर दिया था। गुरु नानक बाग साहिब में देश विदेश से लोग आते हैं।

सीता बनी : चांदपुर क्षेत्र के नारनौर के पास बना एक मठ सीताबनी के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि माता सीता इसी जगह पर धरती में समाईं थीं। इस मठ के आसपास एक विशेष घास पाई जाती है जोकि इस क्षेत्र के अलावा कहीं नहीं दिखती। यहां एक यज्ञकुंड और मठ की संरचना ही बनी हुई है।

किला मोरध्वज : नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच मथुरापोर जगह काफी महत्वपूर्ण है। बताते हैं कि महाभारत समाप्त होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्त मोरध्वज की परीक्षा इसी स्थान पर पहुंचकर ली थी। ऋषि के वेष में आए श्रीकृष्ण के शेर के आगे राजा मोरध्वज ने बेटे का सिर काटकर डाल दिया था। राजा मोरध्वज किला इसी गांव में हुआ करता था, जिसके अवशेष आज भी जगह जगह बिखरे पड़े हैं। गढ़वाल विश्वविद्यालय में इस स्थान से मिली तमाम मूर्तियां और धरोहर सुरक्षित रखी हैं। यहां पर मोरध्वजेश्वर के नाम से शिवमंदिर है।


- इन स्थलों को भी किया गया है प्रस्ताव में शामिल
विदुरकुटी, कण्व आश्रम और पारसनाथ किले के लिए सरकार से बजट मिल चुका है। बाकी स्थलों का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव में झारखंडी देवी मंदिर स्याऊ, मोटामहादेव मंदिर, जोगीरम्पुरी दरगाह, चारमीनार नजीबाबाद, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व, नजीबुद्दौला का किला, सेक्रेड हार्ट चर्च ताजपुर, चार बीघा जमीन में फैला धींवरपुरा का वटवृक्ष, पारसनाथ किला, मोरध्वज किला, सीता बनी, गुरुद्वारा बाग साहिब, जामा मस्जिद मंडावर, गल्खा देवी मंदिर, मेनका ताल को शामिल किया गया है।
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- जिले की 16 धरोहरों की सूची तैयार हुई है : सीडीओ
सीडीओ पूर्ण बोहरा ने बताया कि जिले में करीब 16 ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहरों की सूची तैयार हुई है। इन्हें विकसित करने के लिए योजना तैयार की जा रही है। तीन जगहों के लिए बजट भी आ गया है।

मंडावर क्षेत्र में स्थित गलखा देवी मंदिर।

मंडावर क्षेत्र में स्थित गलखा देवी मंदिर।

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