केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंचा धर्मांतरण का मामला
मेरठ। मंगतपुरम में 400 लोगों के धर्मांतरण का मामला शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंच गया। स्थानीय एलआईयू से इनपुट लेकर दिल्ली से इंटेलीजेंस की टीम मंगतपुरम पहुंची। टीम ने झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली महिलाओं और बच्चों से जानकारी लेकर धर्मांतरण से जुड़ी 50 से अधिक वीडियो जुटाई हैं। लोगों ने बताया है कि पांच साल से दिल्ली का महेश पास्टर मंगतपुरम आता है। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान लोगों को जोड़कर धर्मांतरण का खेल शुरू हो गया था। इसके साथ ही पकड़े गए लोगों ने भी कई राज खोले है।
झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों को ईसाई बनाने के लिए महेश ने करीब पांच साल पहले योजना बनाई थी। पहले वह गरीब लोगों को राशन देकर दिल्ली लौट जाता था। मार्च 2020 में कोरानाकाल में लॉकडाउन लगा तो उसने मंगतपुरम में डेरा डाल दिया। इसके बाद लोगों को पैसा और राशन देकर ईसाई धर्म का पाठ पढ़ाया जाने लगा। महेश ने अपने नौकर अनिल को यहां खासतौर पर लगा दिया। उसने यहां झोपड़ी बना ली और लोगों को सुबह-शाम धर्मांतरण के लिए प्रेरित कर रहा था। धर्मांतरण में महेश के साथ यहां रहने वाले कई लोग शामिल थे।
ढाई साल से चल रहे धार्मिक कार्यक्रमों का कभी किसी ने ने विरोध नहीं किया। बाद में जब महेश ने लोगों को दीपावली और हिंदुओं के अन्य त्योहारों पर आपत्ति की तो शुक्रवार को लोगों ने एसएसपी ऑफिस पहुंच कर धर्मांतरण की बात बताई। इसके बाद मामले की जानकारी लखनऊ तक पहुंच गई। शनिवार को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने भी इसका संज्ञान लिया। जांच-पड़ताल के बाद गृह मंत्रालय भी कार्रवाई कर सकता है।
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दस लोगों ने किया धर्मांतरण, एक की वापसी
मंगतपुरम में चैंपियन नाम के युवक ने बताया कि वह ढाई साल से ईसाई धर्म से जुड़ा था। लॉकडाउन में उसका परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया था, जिस कारण उसने ईसाई धर्म अपनाया था। इसके बाद भी उसने सनातन धर्म के त्योहार मनाने बंद नहीं किए थे। समाजसेवी सचिन सिरोही का कहना कि चैंपियन के अलावा नौ अन्य लोग धर्मांतरण कर चुके हैं। चैंपियन ईसाई धर्म को छोड़ कर सनातन धर्म में लौट आया है।
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डीएम से नहीं ली गई अनुमति
पुलिस का दावा है कि 2021 में बने कानून के तहत धर्मांतरण के लिए डीएम से अनुमति लेनी होती है। पुलिस की जांच में पता चला कि मंगतपुरम के किसी ने अनुमति नहीं ली थी। इस कारण पुलिस अधिकारी कहते हैं कि कानूनन तो किसी का धर्मांतरण नहीं हुआ है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर धर्मांतरण की धारा में नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। जिसमें से तीन महिलाओं समेत आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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नेताओं का दिनभर लगा रहा तांता
धर्मांतरण की खबर के बाद शनिवार को दिनभर मंगतपुरम में लोगों का तांता लगा रहा। भाजपा नेता दीपक शर्मा के अलावा अन्य कई नेता भी वहां पहुंचे। एहतियातन वहां पुलिस तैनात कर दी गई। पुलिस और एलआईयू वहां पर आने वाले लोगों की वीडियोग्राफी की है।
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थाने में महिलाओं का हंगामा
जेल जाने से पहले झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली तीनों महिलाओं ने थाने में हंगामा किया। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण की बात साजिशन कही जा रही है। वास्तव में आरोप लगाने वाले मंगतपुरम से झोपड़ियां हटवाना चाहते हैं। पुलिस ने तीनों महिलाओं को कोर्ट में पेश कर दिया। कोर्ट ने तीनों को धर्मांतरण के आरोप में जेल भेज दिया।
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कई जगह रोका गया धर्म परिवर्तन
धर्म जागरण मंच के प्रचारक ईश्वर दयाल ने बताया कि कोरोना काल में खाद्य पदार्थ देकर मंगतपुरम में धर्म परिवर्तन कराया गया। इससे पूर्व नई बस्ती, लल्लापुर, शिवपुरम, जागृति विहार, किनानगर और तेजगढ़ी आदि स्थानों पर धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोका गया है। हिंदू युवा वाहिनी के निवर्तमान महानगर अध्यक्ष अंकित शर्मा ने बताया कि नई बस्ती में धर्म परिवर्तन लगातार कराया जा रहा है।
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राशन वितरण की बनती थी वीडियो
मेरठ। धर्मांतरण का मामला विदेश से होने वाली फंडिंग से जुड़ा हो सकता है। बताया गया कि यहां धर्मांतरण करने वालों को राशन वितरण की वीडियो बनाकर दिल्ली भेजी जा रही थी। इस तरह की कई वीडियो पुलिस के हाथ लगी हैं। माना जा रहा है कि इन वीडियों को दिल्ली से विदेश भेजा जाता था, फिर वहां से मोटी रकम मंगाई जा रही थी। पुलिस इस प्रकरण से जुड़े हर व्यक्ति की जांच में जुट गई है।
संवाद