तेजवंती देवी ने वर्ष 2010 में अंतिम बार जीवित प्रमाण पत्र जमा कराया था। जिसके बाद उन्हें जीवित मानकर लगातार पेंशन जारी की जाती रही। जुलाई 2022 में जीवित प्रमाण पत्र परिजनों से मिलने पर कार्यालय द्वारा तेजवंती देवी से मिलकर जीवित होने की पुष्टि करनी चाही और पेंशन रोक दी।
उनका पौत्र रवि कुमार पुत्र अश्वनी कुमार कार्यालय पहुंचा और अपनी दादी के जीवित होने की सूचना दी। रक्षा पेंशन संवितरण अधिकारी ने उन्हें कार्यालय लाने को कहा, लेकिन वह उन्हें लेकर नहीं पहुंचा। शक होने पर पिछले वर्षों में मिले उनके जीवित प्रमाण पत्र की जांच कराई गई तो उनके 5 वर्षों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।
इसके बाद कार्यालय के अधिकारी टीपीनगर पुलिस के साथ तेजवंती के आवास पर पहुंचे। वहां उनकी पुत्रवधु कमलेश बहल ने तेजवंती देवी के देहांत की बात स्वीकार की, लेकिन स्पष्ट दिनांक नहीं बता पाई और न ही मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। पुलिस ने तेजंवती के पुत्र अश्वनी कुमार, पुत्रवधू कमलेश और पौत्र रवि के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की।