हर उम्र तक पहुंचा रहे शिक्षा
कनोहर लाल डिग्री कॉलेज की प्रो. किरण प्रदीप पिछले 7 सालों से ज़रूरतमंद बच्चों को भी शिक्षा दें रही हैं। अवकाश वाले दिन कॉलोनी के बच्चों को पढ़ाई के साथ उनके कौशल विकास पर भी ध्यान देती हैं। उनके अनुसार सीखने की कोई उम्र नहीं होती इसलिए वह कॉलेज और घर में चतुर्थ श्रेणी वर्ग की महिलाओं को इंग्लिश बोलना सिखाने के साथ जागरूक भी कर रही हैं।
कबाड़ से जुगाड़ कर बच्चों को पढ़ाया
जानी क्षेत्र के सालेहनगर प्राथमिक विद्यालय की सहायक अध्यापक रीना काकरान ने कबाड़ से जुगाड़ कर बच्चों के लिए लर्निंग मैटेरियल तैयार किया। नवाचार के जरिए बच्चों का भविष्य संवारा। वह सैकड़ों कविताएं भी लिख चुकी हैं। यूट्यूब पर उनका चैनल किलकारी भी काफी प्रसिद्ध है। शिक्षण क्षेत्र में योगदान के लिए उनका राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन हुआ है।
हर उम्र तक पहुंचा रहे शिक्षा
कनोहर लाल डिग्री कॉलेज की प्रो. किरण प्रदीप पिछले 7 सालों से ज़रूरतमंद बच्चों को भी शिक्षा दें रही हैं। अवकाश वाले दिन कॉलोनी के बच्चों को पढ़ाई के साथ उनके कौशल विकास पर भी ध्यान देती हैं। उनके अनुसार सीखने की कोई उम्र नहीं होती इसलिए वह कॉलेज और घर में चतुर्थ श्रेणी वर्ग की महिलाओं को इंग्लिश बोलना सिखाने के साथ जागरूक भी कर रही हैं।
पर्यावरण के प्रति कर रहीं जागरूक
रघुनाथ गर्ल्स पीजी कॉलेज में जन्तु विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रो. कल्पना चौधरी सामाजिक संस्थाएं ‘पहल एक प्रयास’ तथा ‘एनवायरमेंट एन्ड सोशल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन’ आदि के साथ जुड़कर समय समय पर पर पौधरोपण, सड़क सुरक्षा सम्बन्धित जागरूकता अभियान, पर्यावरण के प्रति सजगता के लिए लोगों को प्रेरित करने का काम पिछले दस सालों से कर रही हैं।
हिंदी में करा रहे एमबीबीएस की पढ़ाई
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के एंडोकि्रनोलॉजी (अंत:स्राव विद्या) के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज अग्रवाल हिंदी में एमबीबीएस पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं। वे अब तक दो किताबें लिख चुके हैं। वह साल 2017 से इस अभियान में जुटे हैं कि डॉक्टरी की पढ़ाई कैसे आसान हिंदी भाषा में कराई जा सके। वह 300 से ज्यादा वीडियो और एक हजार से ज्यादा लेख लिख चुके हैं।
थायरायड ग्रंथि पर उनके हिंदी जर्नल का सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल अक्तूबर में विमोचन भी किया था और इसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था। डॉ. पंकज अग्रवाल का कहना है कि वह जो पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं, उसकी शब्दावली मेडिकल की ही है, लेकिन उसे ऐसे लिखा जा रहा है, जिसे स्टूडेंट्स आसानी से समझ सकें और उसका इंटरनेशनल स्टैंडर्ड भी बना रहे।