मेरठ से सटे मवाना में दरियापुर निवासी राजकुमार को निर्दोष होते हुए भी जेल भेजने के मामले में हस्तिनापुर के निलंबित थाना प्रभारी धर्मेंद्र और एक दरोगा को पुलिस अधिकारियों की जांच में दोषी पाया गया है। इन दोनों को परिनिंदा प्रविष्टि से दंडित किया गया है। पीड़ित ने इसकी शिकायत एसएसपी से की थी।
दरियापुर निवासी राजकुमार पुत्र हरिचंद ने बताया कि उसके गांव के किसी व्यक्ति की साजिश के चलते और उसकी थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह से साठगांठ कर उसे मारपीट के मामले में 2018 में जेल भेजा गया था। थाना प्रभारी ने फोन कर उसे थाने बुलाया था। जहां दरोगा प्रमोद ने उसे हवालात में डाल दिया था। उसका वीडियो बनाया गया और चालान काट दिया गया।
तीन दिन बाद जेल से छूटने पर उसने मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित मानव अधिकार आयोग से की थी। जिसके बाद थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह और दरोगा प्रमोद पर जांच बैठाई गई थी। प्रारंभिक जांच में उपनिरीक्षक धर्मेंद्र सिंह और उप निरीक्षक प्रमोद कुमार दोषी पाए गए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिले आदेश के अनुसार अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दंड एवं अपील) नियमावली 1991 के नियम-14 (2) के अंतर्गत इन दोनों को परिनिंदा प्रविष्टि से दंडित किया जा चुका है। इस संबंध में एसएसपी कार्यालय से पीड़ित को भी पत्र भेजकर अवगत कराया है।
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