पुलिस के अनुसार भ्रूण प्रत्यारोपित होने के करीब तीन माह बाद गर्भ में दो बच्चों की जानकारी हुई। मेरठ के निजी अस्पताल में ही महिला ने जुड़वा बेटों को जन्म दिया। लेकिन सरोगेट मां ने एक बच्चे को जीवित तथा दूसरे को मृत बता दिया। जीवित बच्चा ऋषिकेश के दंपती को दे दिया गया। लेकिन बाद में पीड़ित दंपती को मेरठ से ही जानकारी मिली कि उनका दूसरा बच्चा भी जीवित है, जिसे सरोगेट मदर ने छिपा लिया।
रिश्तेदार को दे दिया था एक बच्चा
दंपती ने दूसरा बच्चा पाने के लिए महिला से संपर्क किया और उसके लिए पैसा देने की भी बात कही। लेकिन सेरोगेट मां ने दूसरे बच्चे की जानकारी नहीं दी। 2018 में ऋषिकेश थाने में दंपती ने आरोपी महिला के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करा दिया।
विवेचना में पता चला कि सरोगेट मां ने जुड़वा बच्चे जन्मे थे। लेकिन एक बच्चा महिला ने छिपाकर अपनी रिश्तेदार को दे दिया था। इसके बाद ऋषिकेश पुलिस ने आरोपी सरोगेट मदर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। यह महिला अभी भी जेल में है।
लगातार पीछा करती रही पुलिस
पुलिस के अनुसार देहरादून एसओजी और सर्विलांस टीम ने लगातार महिला के रिश्तेदारों पर संदेह जताते हुए कॉल लिसनिंग पर ली। जिसमें पाया कि सदर क्षेत्र निवासी एक रिश्तेदार के यहां यह तीन साल का मासूम है।
रविवार को एसओ सदर बाजार विजय गुप्ता और देहरादून एसओजी ने बच्चे को बरामद कर लिया। शाम को देहरादून पुलिस मासूम को ले गई। देहरादून पुलिस का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तीन साल का मासूम.. मेरा क्या कसूर
मासूम को लाने के लिए पुलिस टीम सादे कपड़ों में पहुंची। सदर थाने में एसओ के कार्यालय में इस मासूम को लाया गया, जहां वर्दी में किसी को भी नहीं आने दिया। बच्चे को पहले एसओ ने खेलने के लिए अपना मोबाइल दे दिया, बाद में देहरादून के एक सिपाही ने अपना मोबाइल दिया। बच्चे को बिस्किट और संतरा खाने में दिया।
बच्चा मोबाइल से खेलता रहा, नाम पूछने पर हंसने लगा। मम्मी और अन्य के बारे में नहीं बोला। इस मासूम को नहीं पता कि अपनी कोख से जन्म देने वाली मां उसे छिपाने में जेल चली गई और उस पर हक दूसरी मां जता रही है। सवाल यह है कि महिला ने जो किया, उसमें आखिर इस मासूम का क्या कसूर।
दो साल से कानूनी लड़ाई लड़ रही ‘मां’
यूपी के मेरठ में ही खरखौदा की सरोगेट मदर भी दो साल से कानूनी लड़ाई में फंसी है। उसने पांच लाख रुपये लेकर कोख बेच दी थी। लेकिन अब बच्चा देने को तैयार नहीं। इसका मुकदमा खरखौदा थाने में पंजीकृत है। पुलिस का कहना है कि दो साल से दो महिलाएं ‘मां’ होने की लड़ाई लड़ रही हैं।
एसओ खरखौदा कुलवीर सिंह के मुताबिक देहरादून के एक दंपती ने खरखौदा थाना क्षेत्र की एक सरोगेट मदर से संपर्क किया था। पांच लाख रुपये में संतान पैदा करना तय हुआ था। बच्चे ने जन्म ले लिया। लेकिन सरोगेट मां और उसके परिजनों ने मरा हुआ बच्चा पैदा होने की जानकारी देहरादून के दंपति को दे दी।
दंपति ने इसकी जांच की, जिसमें खुलासा हुआ कि बच्चा अपनी सरोगेट मां के पास सुरक्षित है। देहरादून के दंपती ने मां-बेटे को ढूंढ लिया। जिसको लेकर काफी बखेड़ा हुआ। साल 2017 में खरखौदा थाने में सरोगेट मदर के खिलाफ केस दर्ज हुआ।
वहीं, महिला ने साफ इनकार कर दिया कि वह बच्चे को नहीं देगी। यह मामला अब कोर्ट में चल रहा है। जहां पर दोनों महिलाएं बच्चे पर अपना हक जता रही हैं।