मेरठ। भागती-दौड़ती जिंदगी में तनाव लोगों का अहम हिस्सा बन गया है। नतीजतन, मानसिक बीमारियां हो रही हैं, जो सेहत को भी खराब कर रही हैं। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में इस साल पिछले नौ माह में 25,129 मरीज आए हैं। ये अलग-अलग मानसिक बीमारियों से ग्रसित थे, लेकिन तनाव इन सभी की बड़ी समस्या थी। लोगों को जागरूक करने हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इन मरीजों में से 40 प्रतिशत मरीज डिप्रेशन के निकले, जबकि माइग्रेन के 35 प्रतिशत मरीज थे। 10 प्रतिशत को आत्महत्या का विचार आया था। नशे की लत 7 प्रतिशत में पाई गई। बाकी 8 प्रतिशत मरीज सिजोफ्रेनिया, अल्जाइमर, मिर्गी, हिस्टीरिया और फोबिया आदि के निकले।
मन को शांत रखना जरूरी
मानसिक रोगों के बहुत कारण हैं, वैसे की भी कई वजह हैं, जीवनशैली, ज्यादा उम्मीदें, सामाजिक जीवन की परेशानियां आदि। तनाव को कम करने के मन को शांत रखना जरूरी है। यह अभ्यास से आता है। जरूरी को चिकित्सक की मदद लें। - डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक
सोच और विचारों को करें मजबूत
जैसे हम शरीर को सेहतमंद रखने के लिए कसरत करते हैं, ठीक वैसे ही मन व दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए हमें अपनी सोच और विचारों को मजबूत करना होगा। जब मन शक्तिशाली होगा तो मानसिक सेहत खुद ब खुद बेहतर हो जाएगी। - डॉ. कमलेंद्र किशोर, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
संवाद जरूरी
परिजनों को चाहिए कि मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को समझें, उससे संवाद करें। नया सीखने और नई रुचियां विकसित करने के लिए प्रेरित करें। सकारात्मक सोच और रवैया पैदा करें। - डॉ. तरुण पाल, मनोचिकित्सक, मेडिकल कॉलेज
केस स्टडी एक
बागपत रोड के रहने वाले एक व्यक्ति की उम्र 60 साल है। हर वक्त बीमारी से डरे रहते हैं। अगर पास बैठा मरीज छींक भी दे कई दिन तक डरे रहते हैं। पिछले दिनों परिजनों ने उन्हें जिला अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाया। उनकी काउंसिलिंग चल रही है।
केस स्टडी दो
जागृति विहार की रहने वाली 30 साल की अविवाहित युवती को काफी दिनों से सही से नींद नहीं आ रही है। भूख भी कम लग रही है। समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो गया है। मानसिक रोग विशेषज्ञ ने काउंसिलिंग की तो पता चला शादी को लेकर परेशान है।
तनाव ऐसे करें दूर
शारीरिक व्यायाम, योग, ध्यान करें
कम से कम 8 घंटे की नींद आवश्यक रूप से लें
पौष्टिक भोजन, सामान्य दिनचर्या भी स्वस्थ्य जीवन के लिए जरूरी
परिजन भावनात्मक और सामाजिक सहयोग दें