मेरठ। जिला अस्पताल में बनाए जा रहे ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए अभी इंतजार करना होगा। इसे बनाने के लिए छह माह का समय दिया गया था, लेकिन करीब 10 माह होने पर भी यह अभी तैयार नहीं हुआ है। इसके लिए 20 लोगों का चिकित्सीय स्टाफ आना है और अत्याधुनिक मशीनें आनी हैं, लेकिन वे भी नहीं आई हैं। ऐसे में यह बिल्डिंग भी पुरानी बिल्डिंगों की तरह ही सिर्फ ‘दिखावे’ की होकर न रह जाए।
जिला अस्पताल में 12 बेड का ट्रॉमा सेंटर बनाया जा रहा है। निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें दुघर्टनाओं में गंभीर घायलों का समय से इलाज कर जान बचाई जा सकेगी। यहां वेंटिलेटर, ऑक्सीजन, बाईपेप समेत अन्य आधुनिक मशीन और मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर समेत इलाज व ऑपरेशन की सुविधाएं होंगी। इसके लिए एक करोड़ 30 लाख रुपये का बजट जारी किया गया था। इस संबंध में जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यालय के आदेश हैं कि सेंटर को हर हाल में छह महीने में तैयार करना था, लेकिन अभी करीब 70 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। इसके लिए डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी अलग से आएगा, जिसके लिए पत्राचार किया जा रहा है।
साढ़े तीन साल से नहीं चली एमआरआई
जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट बने हुए करीब साढ़े तीन साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। यहां करीब सात करोड़ रुपये की एमआरआई मशीन आनी है, जो अभी तक नहीं आ सकी है। मरीजों को मेगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के लिए या तो मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है या फिर निजी लैब में महंगी जांच कराने को मजबूर हैं। निजी लैब में एमआरआई का तीन से 25 हजार तक खर्च आता है। करीब पांच साल से दो करोड़ रुपये की लागत से जिला अस्पताल में आईसीयू बनकर तैयार है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण अभी शुरू नहीं हो पाई है।