- साढ़े 12 लाख रुपये से अधिक की दवाइयां बरामद, आरोपी जेल भेजे
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद (सहारनपुर)। पुलिस ने अपमिश्रित दवाओं को भारत से ले जाकर खाड़ी देशों में बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। एक महिला सहित चार तस्करों को गिरफ्तार कर इनके कब्जे से भारी मात्रा में अपमिश्रित दवाइयां बरामद की गईं हैं। जिनकी कीमत साढ़े 12 लाख रुपये से अधिक बताई गई है।
सीओ अशोक सिसोदिया के नेतृत्व में पुलिस ने चेकिंग के दौरान मकबरा रजबहे की पुलिया पर झबरेड़ा (उत्तराखंड) की ओर से आई कार से भारी मात्रा में अपमिश्रित दवाइयां बरामद की। सीओ अशोक सिसोदिया ने बताया कि कार में छह बैग रखे थे। जिनसे तलाशी के दौरान न्यू फेंसाड्रिल कफ सीरप की 192 शीशी व प्रेगाब्लिन के 37 हजार 440 बैप्सूल बरामद किए हैं। मौके पर औषधि निरीक्षक को बुलाकर बरामद दवाइयों की जांच कराई गई। जिनकी कीमत 12 लाख 51 हजार 355 रुपये आंकी गई।
गिरफ्तार लोगों में शाहजान पुत्र मुकर्रम निवासी ग्राम कुमराड़ी थाना मंगलौर जनपद हरिद्वार (उत्तराखंड) उसका भाई सलमान, देवबंद कोतवाली के अंबेहटा शेखा गांव निवासी खालिद पुत्र हनीफ व बझेड़ी मुजफ्फरनगर निवासी गजाला पत्नी रजाउल शामिल हैं। जिन्हें रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
- दवाइयां लेकर कई बार जा चुके हैं सऊदी अरब
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि सभी दवाइयों में नशीला पदार्थ मिलाकर इनका इस्तेमाल होता है। जिन्हें सऊदी अरब ले जाकर बेचते हैं। बताया कि वहां ये दवाएं करीब दस गुना महंगे दामों पर बिकतीं हैं। इस काम में कार को दिल्ली एयरपोर्ट तक आने जाने में इस्तेमाल करते हैं। खालिद, शाहजान व गजाला ने अपने पासपोर्ट और टिकट दिखाते हुए बताया कि आज भी वे इन मिलावटी दवाइयों को सऊदी अरब लेकर जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि शाहजान, खालिद व गजाला कई बार इस काम के लिए सऊदी अरब जा चुके हैं।
15 से 20 पॉलीथीन के अंदर रखते थे खेप, नहीं पकड़ पाता था मेटल डिटेक्टर
- खाड़ी देशों में अपमिश्रित दवाओं की तस्करी का मामला
- आरोपियों से पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा, जांच जारी
देवबंद। खाड़ी देशों में अपमिश्रित दवाओं की तस्करी करने वाले गिरोह से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी दिल्ली एयरपोर्ट से प्लेन में बैठकर सऊदी अरब जाते थे। इसके लिए वह एयरपोर्ट पर तैनात सिक्योरिटी को भी चकमा दे जाते थे। आरोपियों ने बताया कि वह दवाई की खेप को काली पाॅलीथीन में रखते थे। इसके बाद उस पॉलीथीन उसी तरह की 15 से 20 पॉलीथीन के अंदर डाल देते थे। जिससे पॉलीथीन की लेयर बन जाते थे। आरोपियों की मानें तो पॉलीथीन की मोटी परत बनने के बाद उसे मेटल डिटेक्टर पकड़ नहीं पाता था। आरोपी इसी बात का फायदा उठाकर प्लेन में जाते थे।
इसके अलावा वह अपने साथ महिला को इसलिए रखते थे कि वह सिक्योरिटी पर तैनात जवानों को बातों में उलझा लेती थी। गिरोह के सभी सदस्य अलग-अलग होते थे। अगर सिक्योरिटी उनकी दवाई देख भी लेती थी तो वह खुद को बीमार बता देते थे। सिक्योरिटी को झांसा दे देते थे कि उनका उपचार चल रहा है और कई माह बाद सऊदी अरब से लौटना होगा। ऐसे में एक साथ इतनी मात्रा में दवाई लेकर जा रहे हैं। जिससे बार-बार न आना पड़े। हालांकि पुलिस आरोपियों की इस कहानी पर यकीन नहीं कर रही है, लेकिन जिस तरीके से आरोपियों ने यह बताया है तो उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
- उत्तराखंड के मंगलौर से लाते थे दवाई
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह दवाई की खेप उत्तराखंड के मंगलौर से लेकर आते थे। वहां पर एक व्यक्ति उन्हें यह खेप देता था। वह व्यक्ति कौन है और गिरोह में कितने सदस्य है इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। अब पुलिस मंगलौर के उस व्यक्ति को तलाश कर रही है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि दवाई की यह खेप नकली भी हो सकती है। इस वजह से दवाई को जांच के लिए भेजा गया है। यह भी पता किया जा रहा है कि आरोपियों का कोई साथी सऊदी अरब में तो नहीं है। जो इस खेल में शामिल हैं।
- कई बार दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़े जा चुके हैं तस्कर
देवबंद पुलिस की गिरफ्त में आए दवा तस्करी करने वाले लोग पिछले काफी समय से इस धंधे में जुड़े हुए हैं। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में यह लोग भारत से खाड़ी देशों में लगातार अपमिश्रित दवाओं की तस्करी कर रहे हैं। सेटिंग के बूते यह लोग एयरपोर्ट सिक्योरिटी को भी पार कर जाते थे। औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद ने बताया कि बीते वर्ष में यह लोग एयरपोर्ट पर चेकिंग में पकड़े भी जा चुके हैं। लेकिन सेटिंग के चलते यह छूट जाते हैं।