मेरठ। सपा को मंगलवार को मेरठ में बड़ा झटका लगा। अप्रत्याशित तरीके से जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह भाजपा में शामिल हो गए। इसी साल नगर निकाय चुनाव से पहले अप्रैल में उन्हें दूसरी बार जिलाध्यक्ष बनाया गया था। भाजपा क्षेत्रीय कार्यालय में क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया की मौजूदगी में वह पार्टी में शामिल हुए। इसके बाद जयवीर सिंह को पार्टी से निष्कासित करने का सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल का 11 जून का एक पत्र जारी किया गया।
जयवीर सिंह साल 2013 से 2017 तक जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन और दो बार डायरेक्टर रहे हैं। जुलाई 2008 से अप्रैल 2017 तक वह सपा जिला अध्यक्ष के पद पर रहे थे। इस बार पार्टी में तमाम विरोध के बावजूद उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया था। उनके जिलाध्यक्ष बनाए जाने से पहले जिला कार्यकारिणी भंग चल रही थी। जयवीर सिंह सैनी गांव के प्रधान भी रहे हैं। इनसे पहले राजपाल सिंह सपा के जिलाध्यक्ष थे। पिछले साल जून में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने प्रदेश की सभी जिला कार्यकारिणीयों को भंग कर दिया था। जयवीर सिंह के पार्टी में शामिल होने के दौरान भाजपा के जिला अध्यक्ष विमल शर्मा, महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल, किसान मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष संजय त्यागी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मनोज पोसवाल, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी गजेंद्र शर्मा, अजय प्रताप सिंह, सुखविंद्र सोम, प्रवीण भड़ाना आदि भाजपा नेता मौजूद रहे। जयवीर सिंह के साथ सपा नेता धर्मेंद्र मलिक भी भाजपा में शामिल हुए।
गणवेश पहनने पर किए गए थे निष्कासित
25 फरवरी 2018 को मेरठ में हुए राष्ट्रोदय कार्यक्रम में जयवीर सिंह गणवेश पहने नजर आए थे। तब वह सपा में थे। उनके गणवेश पहनने की फोटो वायरल हुई तो पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। हालांकि कुछ वक्त बाद उनका निष्कासन खत्म हो गया था। नगर निकाय चुनाव के दौरान अखिलेश यादव के रोड शो के दौरान वही गणवेश पहने उनके फोटो कई जगह लगाए गए थे।
जयवीर तो पहले से ही आरएसएस के हैं
जयवीर सिंह तो पहले से ही आरएसएस के हैं। उनका पार्टी छोड़ना कोई नहीं बात नहीं। जिन लोगों ने उन्हें जिलाध्यक्ष बनाने के लिए सिफारिश की थी, उन लोगों पर भी पार्टी को कार्रवाई करनी चाहिए, उन्हें भी तुरंत पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
- रफीक अंसारी. शहर विधायक, सपा
ऐसे लोग तो आते जाते रहते हैं
ऐसे लोग तो आते जाते रहते हैं, इनसे पार्टी को कोई फर्क पड़ता। पहले भी इन्हें गणवेश पहनने पर पार्टी से निष्काशित कर दिया गया था। इनके कुछ काम लटके पड़े होंगे तो उन्हें पूरा करने के लिए अब भाजपा ज्वाइन कर ली। इनके जाने से सपा को फायदा ही होगा।
- शाहिद मंजूर, पूर्व कैबिनेट मंत्री
सपा के साथ विश्वासघात किया
जयवीर सिंह की विचारधारा सपा से अलग है। इसके बावजूद उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया, लेकिन उन्होंने भाजपा में शामिल होकर पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। वह अपने सुविधा के हिसाब से पार्टियां बदलते रहते हैं।
- चौधरी राजपाल सिंह, जिलाध्यक्ष सपा
11 जून को ही निकाल दिया था
जयवीर सिंह को तो 11 जून को ही पार्टी से निकाल दिया था। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप था। प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र भी जारी कर दिया है। इसकी भनक जयवीर सिंह को लग गई तो उन्होंने भाजपावालों से संपर्क किया।
- अतुल प्रधान, सपा विधायक सरधना
पार्टी की गुटबाजी से असहज महसूस कर रहा था
पार्टी में स्थानीय गुटबाजी से खुद को असहज महसूस कर रहा था। पार्टी के लिए काम करने का मौका नहीं मिल रहा था। इससे आहत होकर सपा छोड़ी है।
- जयवीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष सपा, अब भाजपा नेता
सपा छोड़ने के पीछे की कहानी
जयवीर सिंह के जिलाध्यक्ष बनाए जाने से सपाई नाराज थे। महापौर चुनाव में सपा तीसरे नंबर पर रही, जबकि औवेसी की पार्टी दूसरे नंबर पर रही। इस करारी हार से उनके विरोधी और मुखर हो गए। इस बीच अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटाया जा सकता है। सपा के सूत्रों का कहना है कि जैसे ही यह भनक जयवीर सिंह को लगी तो उन्होंने भाजपाइयों से नजदीकी बढ़ानी शुरू की और भाजपा का दामन थाम लिया।