मेरठ। नगर निगम में स्वच्छ भारत मिशन यूनिट (एसबीएम) प्रभारी मयंक मोहन ने शनिवार को त्यागपत्र दे दिया। आरोप लगाया कि प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने यूनिट में तैनात कर्मचारियों के वेतन की फाइल लौटा दी थी। उनके साथ काम करने वाले कर्मचारी बार-बार वेतन की मांग कर रहे थे, जिससे परेशान होकर उन्होंने त्यागपत्र दिया है। इसे लेकर निगम परिसर में दिनभर चर्चा रही।
स्वच्छता सर्वेक्षण से लेकर महानगर में सौंदर्यकरण और स्वास्थ्य विभाग को बेहतर बनाने के लिए निगम में दो साल पहले एसबीएम यूनिट का गठन हुआ था। सर्वेक्षण रिपोर्ट में 2023-24 में मेरठ नगर निगम फिसड्डी आया था। जिसका ठीकरा एसबीएम पर फोड़ा गया था। एसबीएम की कार्यशैली को लेकर महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने भी कई बार नाराजगी जताई थी। सवाल किया था कि यूनिट प्रभारी सहित 10 से ज्यादा कर्मचारी तैनात हैं, बावजूद इसके सर्वेक्षण सर्वे और स्वास्थ्य विभाग में निगम की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं। करीब 2 लाख से ज्यादा वेतन देने के बाद भी सुधार नहीं हो रहा था। 15 दिन पहले सौरभ गंगवार ने नगर आयुक्त मेरठ की कमान संभाली। विभागाध्यक्षों से कर्मचारियों की कार्यशैली की रिपोर्ट मांगी गई। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने एसबीएम प्रभारी सहित अन्य कर्मचारियों के वेतन की फाइल लौटा दी। प्रत्येक कर्मचारी का कार्य की जानकारी मांगी। जिसके चलते वेतन की फाइल अटकी हुई है। मयंक मोहन ने शनिवार को निगम से त्यागपत्र दे दिया है। आरोप लगाया कि वह दो साल से काम कर रहे थे। प्रत्येक महीने नगर आयुक्त ही समीक्षा करते थे। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि कर्मचारियों के कार्य की समीक्षा करके रिपोर्ट नगर आयुक्त को देनी होती है।