मेरठ। भारत में बारह मास की महिमा अपरंपार है, लेकिन श्रावण अर्थात सावन मास में मन मयूर सा नाचने लगता है। इस दौरान धर्म, अध्यात्म, प्रेम और शृंगार के भाव थिरकने लगने हैं। शुभ सूचना यह है कि इस बार के सावन में आकाशीय मंत्रिमंडल ने अपनी प्रजा के लिए खुशियों और सौगात का पिटारा खोलने का मन बना लिया है। ज्योतिषियों के अनुसार वर्ष 2023 में श्रावण मास की समयावधि लगभग दो माह की तय कर दी गई है। माह की शुरुआत प्रबल राजयोग इंद्रयोग और समाप्ति आयुष्मान योग से होने जा रही है। सोने पे सुहागा यह है कि इस मास में भगवान शिव के साथ ही जगत के पालनहार प्रभु विष्णु की कृपा बरसेगी। यह दुर्लभ संयोग 19 साल बाद बन रहा है।
श्रावण मास को विशेषफलदायी बनाने के लिए आकाश गंगा में बड़े स्तर पर तैयारी चल रही है। भारतीय पंचांग के अनुसार इस बार भक्तों को श्रावण मास में अपने उद्धार का भरपूर अवसर मिलेगा। क्योंकि श्रावण काल लगभग दो माह का रहेगा। यह समयावधि चार जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक अर्थात 58 दिन रहेगी। कारण यह है कि इस बार 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिक मास रहेगा। अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णु हैं इसलिए शिव के साथ ही भगवान विष्णु का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।
चार नहीं, आठ रहेंगे सोमवार
श्रावण के सोमवार के व्रत मनोकामना पूर्ति और दांपत्य सुख के लिए रखे जाते हैं। इस दौरान की गई पूजा से शिव-पार्वती खुश होते हैं। दो माह का श्रावण मास होने से इस बार चार नहीं आठ सोमवार के व्रत होंगे। साथ ही नौ मंगला गौरी व्रत रखने का भी अवसर मिलेगा। एक विशेष बात और कि श्रावण के सोमवार के व्रत रखने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। चंद्रमा मन और धन का कारक ग्रह होता है। इसलिए मानसिक सुख के साथ ही धन-धान्य भरपूर मिलने की संभावना रहती है।
श्रावण मास के व्रत और त्योहार
6 जुलाई संकष्टी चतुर्थी, 13 जुलाई कामिका एकादशी, 14 जुलाई प्रदोष व्रत, 15 जुलाई मासिक शिवरात्रि, 16 जुलाई कर्क संक्रांति, 17 जुलाई श्रावण अमावस्या, 29 जुलाई पदमिनी एकादशी, 30 जुलाई प्रदोष व्रत, एक अगस्त पूर्णिमा व्रत , 4 अगस्त संकष्टी चतुर्थी, 12 अगस्त परम एकादशी, 13 अगस्त प्र्रदोष व्रत, 14 अगस्त मासिक शिवरात्रि, 16 अगस्त अमावस्या, 17 अगस्त सिंह संक्रांति, 19 अगस्त हरियाली तीज, 21 अगस्त नागपंचमी, 27 अगस्त श्रावण पुत्रदा एकादशी, 28 अगस्त प्रदोष व्रत, 30 अगस्त रक्षाबंधन और 31 अगस्त श्रावण पूर्णिमा।
आकाश गंगा से बरसेंगे राजयोग
आकाश गंगा में इस बार अनेक शुभ और राजयोग बन रहे हैं। चार जुलाई से इनकी बरसात शुरू हो जाएगी। सावन के पहले दिन का स्वागत बुधआदित्य, इंद्र, पदम व त्रिपुष्कर योग करेंगे। इन राजयोग और इस काल में पूजा का फल कई गुणा अधिक मिलता है। विशेष बात यह है कि सावन का सात व आठवां सोमवार व्रत विशेष फलदायी होंगे। सातवां साेमवार अर्थात 21 अगस्त को शुभ योग बनेगा। इस अवसर पर कोई भी शुभकार्य आरंभ करना विशेष फलदायी होगा। आठवां सोमवार अर्थात 28 अगस्त को आयुष्मान योग रहेगा। इस योग का प्रभाव 27 अगस्त से ही शुरू हो जाएगा। इस अवसर पर पूजा विधान से स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु प्राज होती है।
इस बार आठ सोमवार होगी शिव पूजा
श्रावण के सोमवार के व्रत मनोकामना पूर्ति और दांपत्य सुख के लिए रखे जाते हैं। इस दौरान की गई पूजा से शिव-पार्वती खुश होते हैं। दो माह का श्रावण मास होने से इस बार चार नहीं आठ सोमवार के व्रत होंगे। - मनीष स्वामी, आचार्य एवं धर्माचार्य
शिव के साथ विष्णु के बनेंगे कृपा पात्र
श्रावण मास में अधिक मास होने के कारण श्रावण की अवधि 58 दिन रहेगी। इस बार 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिक मास रहेगा। इस बार भगवान विष्णु की भी कृपा मिलेगी। कई शुभ योग अलग अलग दिन बन रहे हैं। - आचार्य कौशल वत्स, सचिव, इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस