पुलिस मलती रह गई हाथ, अन्य आरोपियों की तलाश जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। इंजीनियर विमल उर्फ शैंकी हत्याकांड के आरोपी संजय मानपुर और उसके भांजे विशाल ने पुलिस को चकमा देते हुए शनिवार को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उनके न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। सात दिन से आरोपियों की तलाश में लगी पुलिस हाथ मलती रह गई। जबकि पुलिस ने कचहरी में घेराबंदी कर रखी थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
न्यूटिमा अस्पताल के सामने रविवार रात चाय की दुकान पर जागृति विहार सेक्टर-2 निवासी रिटायर्ड पुलिस दरोगा प्रमोद त्यागी के इंजीनियर बेटे विमल उर्फ शैंकी की लाठी-डंडों और चाकू से हमला कर हत्या कर दी गई थी। पिता ने भावनपुर क्षेत्र के मानपुर गांव निवासी संजय और उसके भाई मोनू, भांजे कंकरखेड़ा निवासी विशाल और दोस्त सुनील फौजी व सागर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विमल का संजय मानपुर से 80 हजार रुपये को लेकर विवाद था। कई बार वापस मांगने पर भी वह रुपये वापस नहीं कर रहा था।
दो सितंबर को संजय मानपुर ने विमल और उसके साथियों के खिलाफ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मुकदमे में कोई कार्रवाई नहीं की। तभी से संजय मानपुर अपने साथियों संग विमल से बदला लेने की फिराक में था। इसकी भनक लगने पर विमल ने सीएम पोर्टल पर शिकायत कर संजय व उसके भाई मोनू और भांजे विशाल से जान का खतरा जताया था। विमल की हत्या के छह दिन बाद भी पुलिस के हाथ कोई आरोपी नहीं आया था। शुक्रवार को ही सभी आरोपियों पर 25-25 हजार के इनाम की घोषणा की गई थी।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि संजय मानपुर और विशाल ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
एंबुलेंस संचालकों से की जा रही पूछताछ
संजय मानपुर का गिरोह मेडिकल काॅलेज के गेट के आसपास ही मौजूद रहता था। संजय मानपुर और अन्य लोग इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को वह निजी अस्पतालों में भिजवाते थे। इसके बदले इन अस्पतालों से मोटा कमीशन वसूला जाता था। पुलिस का मानना है कि एंबुलेंस चालकों को फरार आरोपियों के ठिकाने की जानकारी है। इसके चलते एंबुलेंस चालकों से पूछताछ की जा रही है।