संन्यासी कभी भी अपनी पहचान नहीं बनाना चाहता
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 34वें दिन बुधवार को सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य कंवरसेन जैन पंजाब को प्राप्त हुआ। स्वर्ण कलश अभिषेक करने का सौभाग्य ब्रह्मचारी भावेश भैया एवं संजय भैया इंदौर को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्य कंवरसेन जैन पटियाला, नरेंद्र जैन, विशाल जैन, अमित जैन, सुमित जैन, फिरोजपुर पंजाब को मिला। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला दीप प्रज्ज्वलन आयुष ने किया। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। उन्होंने 111 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन, नीलम जैन ने संस्कृत भाषा में किया। आज विधान के मध्य विनोद एंड म्यूजिक पार्टी की मधुर लहर सुनील जैन, प्रवीण जैन ने भजन प्रस्तुत किया। जिसको सुनकर सभी भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। समस्त स्थानीय जैन समाज, बड़ा मंदिर व गुरुकुल के समस्त स्टाफ तथा बच्चों ने सभी कार्यक्रमों में उपस्थिति दर्ज कराई। पूज्य गुरुवर श्रीधवल सागर जी ने मंगल उद्बोधन में कहा कि स्वयं के साथ-साथ दूसरों के कल्याण का भाव ही दीक्षा की ओर अग्रसर करता है। संन्यासी कभी भी अपनी पहचान नहीं बनाना चाहता। वह बस यही कामना करता है कि हे प्रभु मेरी साधना, मेरे पुण्य मेरे तप एवं त्याग से मेरा तो कल्याण हो। इसके साथ ही दूसरों के दुखों का भी नाश हो। मेरे पास देने को मात्र आशीर्वाद है। संन्यास का निर्माण अतीत के पुण्य और वर्तमान के सहयोग से होता है। माता-पिता तो शरीर का निर्माण करते हैं परंतु संन्यास और ज्ञान का निर्माण गुरु द्वारा ही होता है। यहां मनोज जैन, सुभाष जैन, राजीव, प्रेम जैन, विपिन शर्मा आदि समेत क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल, शशांक, प्रवीण, जितेन्द्र, विजय कुमार मेरठ का सहयोग रहा।