शामली। होटलों, ढाबों के बाहर नाम और रेट लिस्ट लिखने के आदेश का जहां भाजपा नेता स्वागत कर रहे हैं। वहीं अन्य दलों के नेता विरोध जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की पोस्ट लोग कर रहे हैं।
रालोद के पूर्व विधायक राव वारिस ने पोस्ट डालते हुए कहा कि आज एक प्रसिद्ध कहावत याद आ गई। व्हाट इस इन ए नेम यानी नाम में क्या रखा है? एकता और भाईचारा किसी प्रगतिशील समाज की मूलभूत जरूरत है। मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना , हिंदी हैं हम वतन है हिंदोस्तां हमारा।
रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुकानदारों को अपने दुकान पर नाम लिखने का प्रशासन निर्देश अनुचित है। इसे प्रशासन को वापस लेना चाहिए।
भाजपा के पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार द्वारा निर्णय बहुत ही सराहनीय। नाम बताने में किसी की कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। नाम बताकर रोजगार करने में गलत क्या हैं?
बसपा के जिलाध्यक्ष सुनील जाटव का कहना है कि दुकानों पर नाम लिखने का आदेश पूरी तरह से गलत है। प्रशासन और सरकार को इसे जल्द से जल्द वापस लेना चाहिए।
रालोद नेता राजन जावला ने एक्स पर पोस्ट डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश प्रशासन का दुकानदारों को अपने दुकान पर अपना नाम लिखने का निर्देश देना जाति और संप्रदाय को बढ़ावा देने वाला है। प्रशासन इसे वापस ले यह गैर संवैधानिक है।
कांग्रेस के युवा प्रदेश महासचिव अश्वनी शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश की गंगा जमुनी तहजीब को खत्म करना चाहती है। रोजगार को धार्मिक आधार पर बांटना गलत है। आस्था के नाम पर धार्मिक बंटवारा सही नहीं है।