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यूपी: 'योगीराज' में फर्जी आधार से राशन घोटाला, 149 डीलरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

Fri, 31 Aug 2018 01:01 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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राशन कार्ड के नाम पर मेरठ में जमकर धांधली हुई। जिला पूर्ति कार्यालय के अनुसार माफियाओं ने एक आधारकार्ड को कई-कई राशन कार्डों से लिंक कराकर घोटाले को अंजाम दिया। शासन की सख्ती के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने जिले के 149 राशन डीलरों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करा दी है। मामले में कंप्यूटर एजेंसी का खेल भी सामने आ रहा है। इसकी भी जांच कराई जा रही है। विभाग की इतनी बड़ी कार्रवाई से राशन माफिया में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि एक -एक डीलर के 30 से 40 फीसदी तक राशन कार्ड फर्जी लिंक किये गये हैं। आधार कार्ड को लिंक करने के लिए अधिकारियों की आईडी का इस्तेमाल किया गया।

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मेरठ में ही खुला था फर्जी राशन कार्डों का मामला
योगी सरकार बनने के बाद भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मामले की सीएम योगी आदित्यनाथ से की थी। इस पर उन्होंने मामले की जांच एसआईटी से कराई थी। एसआईटी की जांच में करीब 40 हजार राशन कार्ड फर्जी मिले थे। प्रदेशभर में इस तरह का बड़ा घोटाला पकड़े जाने पर सरकार ने राशन वितरण प्रणाली को बदलते हुए इसे आधारकार्ड से जोड़ दिया था। कई महीनों की कवायद के बाद जनपद में 4 लाख 35 हजार राशन कार्ड आधारकार्ड से लिंक किए गए हैं। इन कार्डों में मुखिया समेत करीब 18 लाख 53 हजार यूनिट है। 9229 अंत्योदय कार्ड है।

रिपोर्ट में क्यों हुई देरी
उप्र सरकार ने लखनऊ कंट्रोल रूम के माध्यम से पूरे प्रदेश में कार्ड धारक और उनके आधार कार्ड का ऑनलाइन सत्यापन कराया। तो पाया गया कि काफी ऐसे परिवार हैं जिनके आधार कार्ड -कई कई दुकानों पर लिंक हैं। जिनके आधार पर राशन निकाला जा रहा है। इसके आधार पर पूरे प्रदेश में जांच करके रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दे दिये गये थे। बड़ा सवाल यह है कि जहां अन्य जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई होती रही तो वहीं मेरठ में मामले को दबाकर रखा गया। यह हाल तो तब रहा जबकि  इसकी शुरुआत मेरठ से ही हुई थी। आला अधिकारी आखिर किसके दबाव में एक्शन से बचते रहे। जब मामले ने तूल पकड़ा और आयुक्त ने भी बैठक में साफ कहा कि कार्रवाई करो, तब जाकर राशन डीलरों के खिलाफ तहरीर दी गई।

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गलतियों की भी भरमार
जिस संस्था को राशन कार्ड फीड करने और आधार कार्ड लिंक करने का ठेका दिया गया है। उस संस्था द्वारा लगाए गए कंप्यूटर आपरेटरों के कारण भी राशन कार्ड धारक परेशान हैं। किसी राशन कार्ड में पति को पिता बना दिया है तो किसी के पिता को पति बनाकर दर्ज कर दिया है। जिलापूर्ति कार्यालय में राशन कार्ड और आधार कार्ड लिंक में गड़बड़झाले की शिकायत करने वाले पुरुष व महिलाओं की भीड़ रही।

कोट
जिला पूर्ति विभाग कार्यालय की तरफ से कराई गई जांच में राशन की कालाबाजारी कर रहे 149 डीलरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। बाकी डीलरों की जांच भी हो रही है। -विकास गौतम, जिलापूर्ति अधिकारी। 

पॉश कालानियों में गरीबों के नाम पर कार्ड
सामने आया कि पॉश कालोनियों में बडे़ लोगों के नाम पर राशन कार्ड बना दिये गये। अधिकारियों की आईडी से इन राशन कार्डों के आधार लिंक कराये गये। सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए आधारकार्ड को लिंक करते हुए पीओएस मशीनों के जरिये राशन वितरित किया जाता है। भ्रष्ट राशन डीलरों और राशन माफिया ने इस सिस्टम में भी सेंधमारी करके गरीबों के राशन को डकारा, यहां तक की पॉश कालोनियों में रहने वाले लखपतियों के नाम भी राशन कार्ड बनवाये गये। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि इन राशन कार्डों को आधार कार्ड से लिंक कैसे कराया गया। पल्लवपुरम, शास्त्रीनगर, जागृति विहार, शताब्दीनगर, आदर्श नगर, जैन नगर, थापर नगर, साकेत जैसी पॉश कालानियों में दस हजार से ज्यादा राशन कार्ड बने हैं।

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