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पांच साल में बढ़ा सिर्फ टैक्स का बोझ, नहीं घटीं मुश्किलें

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पांच साल में बढ़ा सिर्फ टैक्स का बोझ, नहीं घटीं मुश्किलें
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मेरठ। नगर निगम के मौजूदा बोर्ड की 19 तारीख को प्रस्तावित बैठक अंतिम हो सकती है। माना जा रहा है कि इसके बाद निकाय चुनाव का बिगुल बज जाएगा। वर्ष 2017 में अक्तूबर में ही चुनाव आचार संहिता लागू हो गई थी। इस पांच वर्ष की अवधि में जनता पर सिर्फ टैक्स का बोझ बढ़ता ही रहा। सुविधाओं के नाम पर शहर को कुछ खास नहीं मिला।
मौजूदा बोर्ड के अधिकतर सदस्य भी असंतुष्ट ही दिखे। अधिकतर ने माना कि बोर्ड जनहित में कुछ खास नहीं कर पाया। हालांकि ये इसकी वजह बजट न मिलने को बताते हैं। बढ़े नामांतरण शुल्क, भवनों पर टैक्स लगाने के लिए जीआईएस सर्वे से आम जनता पर बोझ बढ़ा है। न मेरठ स्मार्ट बन सका और न ही मल्टीलेवल पार्किंग मिली। सड़कों के गड्ढे, सिल्ट से अटे नाले और जलभराव मुसीबत ही बने रहे। बोर्ड सदस्य आपसी खींचतान में ही मशगूल रहे।
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कोई भी संतुष्ट नहीं
मेरे समेत कोई भी पार्षद बोर्ड के निर्णयों से संतुष्ट नहीं है। बोर्ड कई बार नामांतरण शुल्क की पुरानी दरें लागू कराने का प्रस्ताव पास कर चुका है जो लागू नहीं हुआ।- राकेश जैन, मनोनीत भाजपा पार्षद।
भाजपाई बने रोड़ा
भाजपा पार्षद ही शहर के विकास में अड़ंगा बनते रहे। सरकार ने बजट नहीं दिया। भाजपाई नामांतरण शुल्क बढ़ाने के समथर्न में रहे और मल्टीलेवल पार्किंग के विरोध में रहे।- गफ्फार, पार्षद।
सियासत में फंसे काम
प्रदेश में जिसकी सरकार होती है उस पार्टी का जनता महापौर नहीं चुनती। शहर का विकास राजनीति की भेंट चढ़ता रहा है। इस बोर्ड में तो विकास के नाम पर कुछ हुआ ही नहीं। - पंकज कतीरा, पूर्व पार्षद भाजपा।
बोर्ड बैठक भी अनियमित
- हरिकांत अहलूवालिया के बोर्ड में सदन की बैठक समय पर होती थी। सुनीता के बोर्ड में न तो नियमित बैठक हुईं और न ही जनहित के मुददे उठे। रविन्द्र तेवतिया, पूर्व पार्षद।
जिम्मेदारी भूला बोर्ड
न सड़कें गड्ढा मुक्त हुई और न जलनिकासी का प्रबंध हुआ। महापौर सुनीता वर्मा का बोर्ड अपनी जिम्मेदारी भूल गया। जहां महापौर को भरपूर वोट मिले वहां भी काम नहीं हुए। जगपाल बौद्ध, पूर्व पार्षद।
सरकार ने बढ़ाया जनता पर बोझ
जीआईएस सर्वे और बढ़ा नामांतरण शुल्क प्रदेश सरकार की देन है। नगर निगम बोर्ड लगातार इसका विरोध करता रहा है। अधिकारियों की लापरवाही से भी शहर का विकास प्रभावित हुआ। अगली बोर्ड बैठक में जलभराव से मुक्ति, खुले नाले ढकवाने, सड़कों के गड्ढा मुक्ति आदि के प्रस्ताव लाएंगे। - सुनीता वर्मा, महापौर।
निकाय चुनाव में बढ़ सकते हैं 10 फीसदी वोटर- शीर्षक
2017 में 1123024 थी मतदाताओं की संख्या, 1009 थे बूथ
तमिलनाडु और बिहार से पहुंची छह हजार से अधिक ईवीएम
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। निकाय चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। पूरे जनपद में 1300 अधिक बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन कर रहे हैं। नए वोट बनाए जाने का काम तेजी से चल रहा है। पूरे जनपद में 2017 में जहां 1433142 मतदाता थे वहीं, इस चुनाव में इनकी संख्या 10 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है। ऐसा हुआ तो कई जगह बूथ भी बढ़ जाएंगे। बीएलओ के कार्य की समीक्षा के लिए शनिवार से कलक्ट्रेट में रोजाना बैठक भी होगी।
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दिसंबर में निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। जिले में एक नगर निगम, दो नगर पालिका और 13 नगर पंचायत हैं। नगर निगम का चुनाव ईवीएम से होगा। बाकी जगह चुनाव बैलेट से होगा। तमिलनाडु और बिहार से छह हजार से अधिक ईवीएम आ चुकी हैं। बीएलओ नियुक्त कर दिए गए हैं। कई जगहों से बीएलओ के नहीं जाने की शिकायतें मिलने पर प्रशासन ने सख्ती कर दी है। शनिवार दोपहर को कलक्ट्रेट में बीएलओ की समीक्षा बैठक बुलाई गई है। शिफ्टवार बीएलओ बुलाए गए हैं। चुनाव के नोडल अधिकारी एडीएम प्रशासन अमित कुमार ने बताया कि रोजाना बीएलओ के कार्यों की समीक्षा होगी। अगर कहीं से लापरवाही की शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी। कई जगह से शिकायम मिली है कि बीएलओ क्षेत्र में ही नहीं गए हैं, ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित किया जा रहा है। मतदाता सूची के पुन:निरीक्षण का कार्य तेजी से पूरा कराया जाएगा।
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वर्ष - 2017 में निकायों में मतदाताओं की संख्या:
निकाय का नाम - बूथ - कुल मतदाता
नगर निगम मेरठ - 1009 - 1123024
नगर पालिका मवाना - 75 - 65479
सरधना - 55 - 48600
खरखौदा - 12 - 10867
सिवालखास - 21 - 17046
हस्तिनापुर - 25 - 21983
किठौर - 27 - 20200
परीक्षितगढ़ - 17 - 15975
लावड़ - 22 - 17820
बहसूमा - 11 - 9941
फलावदा - 18 - 15712
करनावल - 12 - 9603
दौराला - 17 - 16647
शहाजहांपुर - 13 - 12382
हर्रा - 18 - 12445
खिवाई - 19 - 15418
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