मेरठ। सिपाही की बेटी को काटने वाला पिटबुल 72 घंटे बाद भी नगर निगम को नहीं मिल पाया। सिर्फ उसका फोटो मिला है। पिटबुल और उसका मालिक गांव में होना बताया गया है, जहां पर पुलिस ने दबिश तक नहीं दी है। खूंखार कुत्तों के मामले में नगर निगम लीपापोती कर रहा है। शायद यहीं वजह कि कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
कंकरखेड़ा स्थित वैष्णो धाम कॉलोनी में रहने वाले यूपी पुलिस के सिपाही सुधीर मलिक की सात साल की बेटी वर्णिका को तीन दिन पहले पड़ोसी के पिटबुल ने काट लिया था। कंकरखेड़ा थाने में कुत्ते के मालिक राजकुमार पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। लेकिन तीन दिन बाद भी पुलिस और नगर निगम की टीम न पिटबुल का पता लगा पाई और न मालिक का।
पशु कल्याण अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को भी नगर निगम की टीम पिटबुल को पकड़ने के लिए कंकरखेड़ा गई थी। राजकुमार के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि पिटबुल को गांव भिजवा दिया है। उसकी वीडियो और फोटो भी उपलब्ध करा दी। इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा नीरज मलिक का कहना है कि पिटबुल को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। पिटबुल की फोटो निगम के अधिकारियों को मिली है। पिटबुल के मालिक की तलाश में पुलिस की दबिश जारी है।
खूंखार कुत्तों के सामने लाचार नगर निगम
अमेरिकन पिटबुल, साइबेरियन, हस्की, फिसेर बाक्सर, रोडविलर, ग्रेटडेन नस्ल के खूंखार कुत्तों को रखने का शौक बढ़ रहा है। खूंखार नस्ल के कुत्ते जनपद में 985 हैं, जिनके सामने नगर निगम लाचार है। इनके लाइसेंस तक नहीं बनाए गए हैं ताकि उन पर नजर रखी जा सके। कुत्तों को वैक्सीन तक नहीं लगवाई जा रही है। यह बताया गया कि 2023 में नगर निगम ने एक भी एक कुत्ते का लाइसेंस नहीं बनाया।