मेरठ। मोदीपुरम स्थित विनायक विद्यापीठ कॉलेज के रास्ते को लेकर बुधवार को राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर ने सूरजकुंड स्थित महापौर के कैंप कार्यालय पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि साजिश के चलते चार-पांच लोगों से प्रदर्शन कराया जाता है और फिर उसको सोशल मीडिया पर वायरल किया जाता है। इस मामले की डीएम दीपक मीणा ने एसडीएम सरधना महेश दीक्षित से जांच कराई थी, जिसमें स्पष्ट हो गया कि रास्ता निजी है, जिसमें बाहरी लोगों की आवाजाही नहीं कराई जा सकती है।
सोमेंद्र तोमर ने बताया कि विनायक विद्यापीठ और साईं एजुकेशनल दो ट्रस्ट थीं। विनायक विद्यापीठ कॉलेज 2009 में मैंने खरीदा था। उसके बराबर में साईं एजुकेशनल की जगह में पूर्व सैनिक सहित चार-पांच लोगों ने प्लाट खरीद लिए। कॉलेज का रास्ता निजी है। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए रास्ते पर कई साल पहले गेट लगा दिया था, जिसको लेकर पूर्व सैनिक नीरज कुमार, इंद्रवीर सिंह और गजेंद्र सिंह ने डीएम से शिकायत की थी, जिस पर तहसीलदार सरधना ने जांच कर रिपोर्ट एसडीएम सरधना को सौंप दी। यह जांच रिपोर्ट एसडीएम सरधना महेश प्रसाद दीक्षित ने डीएम को भेज दी है, जिसमें स्पष्ट हो गया कि विनायक एजुकेशनल एवं सोशल वेलफेयर ट्रस्ट बिजेंद्र सिंह और साईं एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के नाम दर्ज है। सोमेंद्र तोमर द्वारा कॉलेज में जाने के लिए एक किसान से रास्ता खरीदा था, जिसका बैनामा भी राज्यमंत्री के पास है। उन्होंने कहा कि राजस्व अभिलेख के अनुसार विवादित भूमि पर कोई सरकारी रास्ता अंकित नहीं है। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि जिस रास्ते को लेकर पूर्व सैनिक प्रदर्शन कर रहे हैं, उसमें नौ साल पहले गेट लगा था। इस रास्ते के संबंध में एक समझौते की नकल न्यायालय में प्रस्तुत की है, जिसमें राजवीर सिंह बनाम सोमेंद्र तोमर के बीच रास्ते का समझौता बताया गया है। राज्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए रास्ते में पहले ही गेट लगा दिया था। डीएम द्वारा कराई जांच में स्थिति साफ हो गई, बावजूद इसके कुछ लोग बेवजह प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके पीछे कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं।