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साल्ट नहीं...हमें तो उसी ब्रांड की दवाई चाहिए

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- फोटो : AMAR UJALA
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ब्रांड के फेर में ग्राहक, दवा उपलब्ध, अब वैराइटी का चक्कर व्हाट्सएप मैसेज के जरिए बड़ी संख्या में मंगा रहे दवा किसी दवा व्यापारी का कहीं माल फंसा है तो बताएं, होगी मदद: केमिस्ट-ड्रगिस्ट एसोसिएशन मेरठ। \" भैया, साल्ट वाल्ट नहीं...हमें तो उसी ब्रांड की दवाई चाहिए, जो पहले से ले जा रहे हैं।\" खैर नगर में दवा को लेकर ये एक नई समस्या पैदा हो रही है। दवाएं तो उपलब्ध हैं मगर वैरायटी का झंझट है। लोग ब्रांड के फेर में हैं, उन्हें साल्ट से मतलब नहीं है, ब्रांड चाहिए। केमिस्ट एंड ड्रजिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि यह एक समस्या आ रही है। हालांकि दवा की उपलब्धता पर्याप्त है। साथ ही उन्होंने सभी दवा व्यापारियों से कहा है कि किसी का कोई माल कहीं अटका हुआ हो, दवा को लेकर कोई दिक्कत आ रही हो तो उनसे संपर्क कर सकते हैं। वे प्रशासन के जरिए इसका हल निकलवाएंगे, मदद करेंगे। उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप मैसेज के जरिए बड़ी संख्या में लोग दवा मंगा रहे हैं। लोग सामान्य बीमारियों की भी बड़ी तादाद में दवाई मंगा रहे हैं। शुक्रवार को भी जाम कम लगा और दवाओं की बिक्री पहले से दोगुनी हो गई है। केमिस्ट एंड ड्रजिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह ने बताया कि खैर नगर में सबसे ज्यादा शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, किडनी, लीवर आदि बीमारियों से संबंधित दवाइयां ली जा रही हैं। इसके अलावा सामान्य बीमारियों की भी लोग दवाई लेकर इकट्ठा कर रहे हैं। जैसे सिर दर्द ,पेट दर्द , बुखार, उल्टी और डायरिया संबंधी समस्याओं की दवाएं भी हैं। गौरतलब है कि है प्रशासन की तरफ बुधवार को व्हाट्सएप नंबर जारी किए गए थे, जिसमें लोग अपना नाम पता और दवा का नाम लिखकर भेज सकते हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भीड़ न लगे। जबकि रिटेलर अपने ड्रग्स लाइसेंस का पर्चा लेकर खैरनगर में दवा खरीद सकते हैं। बाकी शहर के मेडिकल स्टोर सामान्य तरीके से पिछले निर्देशों के अनुसार खुल रहे हैं। चिकित्सकों ने भी शुरू की ऑनलाइन स्टे होम सेवा मेरठ। शहर में कई चिकित्सकों ने ऑनलाइन स्टे होम सेवा शुरू की है। इसके तहत मरीज ऑनलाइन वीडियो कॉलिंग के जरिए चिकित्सक से परामर्श ले सकते हैं । चिकित्सक की फीस जमा करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। लॉक डाउन की वजह से लोग अपने घरों से ज्यादा नहीं निकल पा रहे हैं। इसके अलावा निजी चिकित्सकों ने अपनी ओपीडी बंद की हुई है और वह सिर्फ इमरजेंसी सेवा में ही अस्पतालों में देख रहे हैं। इसलिए यह व्यवस्था की जा रही है। जल्दी और भी चिकित्सक और अस्पताल इसमें शामिल हो सकते हैं।
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