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Meerut News: गृहकर पर निर्णय नहीं, 30 करोड़ से ज्यादा का निगम का नुकसान

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मेरठ। जीआइएस सर्वे भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा हुआ है, जिसके चलते नगर निगम भवन स्वामियों से पुराना गृहकर नहीं ले रहा है। इसे निगम को करीब 30 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। निगम के अधिकारी तय नहीं कर पा रहे कि नया गृहकर लिया जाए या फिर पुराना। सवाल उठता है कि पार्षदों और संयुक्त व्यापार संघ ने सिर्फ जीआइएस सर्वे पर आरोप लगाए हैं। निगम को पुराना गृहकर लेने से नहीं रोका है।
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गृहकर का मामला तूल पकड़ सकता है। महापौर, पार्षद और संयुक्त व्यापार संघ ने जीआइएस सर्वे के आधार पर नये गृहकर पर आपत्ति लगा दी है। निगम अधिकारियों ने भवन स्वामियों को गृहकर के बिल देना बंद कर दिया। जिसको लेकर निगम को करोड़ों की हानि हो रही है। नये गृहकर पर आपत्ति है और पुराना गृहकर निगम नहीं ले रहा है। नतीजा तीन-चार महीने से निगम के खजाने में गृहकर का कोई पैसा नहीं आ रहा है, जबकि तीन महीने में करीब 30 करोड़ की धनराशि निगम को मिल जानी चाहिए थी। महापौर हरिकांत अहलूवालिया का कहना है कि 9 सितंबर को नगर निगम की बोर्ड बैठक है। इसमें गृहकर को लेकर पार्षदों द्वारा चर्चा की जाएगी। स्थिति स्पष्ट होगी कि नगर निगम जीआइएस सर्वे को खारिज कर पुराना गृहकर लें। हालांकि, नगर निगम अधिकारी नया गृहकर लेने पर अड़ा हुआ है। भवन स्वामी भी असमंजस की स्थिति में है कि आखिर कौन सा गृहकर जमा करें।
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