निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। सोमवार शाम को आरक्षण सूची जारी की गई। कई दावेदारों को मायूसी हाथ लगी तो कई दावेदारों की उम्मीदों को पंख लग गए। नगर निगम के महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत चेयरमैन पद का आरक्षण जारी किया गया है। इसके बाद ही सभी दल अपने अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करेंगे। सभी दलों में टिकट मांगने वालों की भरमार है।
मेरठ महापौर सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित, सामान्य वर्ग के नेताओं को झटका
मेरठ महापौर सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई है। सीट के आरक्षण के बाद सामान्य वर्ग के नेताओं को झटका लगा है। मेरठ में भाजपा से दर्जनों नेता टिकट की दौड़ में थे।
2017 में मेरठ नगर निगम की सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। बसपा से चुनाव लड़ी सुनीता वर्मा ने कांता कर्दम को 15 हजार से अधिक वोटों से हराया था। उस समय सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित थी। इस बार भाजपा इस सीट को हर हाल में जीतने की कवायद में जुटी है। इस बार सीट के पहले से ही ओबीसी या सामान्य कोटे में जाने की संभावना थी।
वहीं सोमवार को आरक्षण पर मुहर लग गई है। अब मेरठ में महापौर सीट ओबीसी के लिए आरक्षित कर दी गई है। सीट ओबीसी होने के बाद पंजाबी समाज, जैन समाज, वैश्य, ब्राहमण, त्यागी, राजपूत समाज के नेताओं को झटका लगा है।
निकाय चुनाव को लेकर शुक्रवार को शासन ने महापौर सीट के लिए आरक्षण जारी कर दिया।
शनिवार शाम तीन बजे नगर विकास मंत्री एके शर्मा लखनऊ लोकभवन मीडिया सेंटर पर पत्रकारों से वार्ता करके नगर निगम के महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत चेयरमैन पद के आरक्षण की घोषणा करने वाले थे, लेकिन दोपहर बाद इसे स्थगित कर दिया गया। रविवार को भी लोग आरक्षण सूची का इंतजार करते रहे। वहीं खतौली में उपचुनाव के बाद आज शाम को आरक्षण जारी किया गया।