फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Nikay Chunav 2023: चुनाव में सिरदर्द बनेगी सपा की गुटबाजी, आखिरी समय में प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस

Sat, 15 Apr 2023 04:07 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राजनैतिक पार्टियों ने चुनाव में उतरने के लिए कमर कस ली है। हालांकि सपा समर्थकों की गुटबाजी खत्म नहीं हो रही है। वहीं कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस आखिरी वक्त पर प्रत्याशियों के नाम घोषित करेगी।
विज्ञापन
यूपी निकाय चुनाव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सपा समर्थकों की गुटबाजी खत्म नहीं हो रही है, जो नगर निकाय चुनाव की तैयारी में जुटी पार्टी के लिए सिरदर्द बनेगी। महापौर प्रत्याशी सीमा प्रधान और उनके पति विधायक अतुल प्रधान के लिए सबको साथ लेकर चलना चुनौती होगा। 

विज्ञापन


निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अभी तक नौ माह से ज्यादा समय से भंग चल रही जिला कार्यकारिणी का गठन तक नहीं हुआ है, सिर्फ जिलाध्यक्ष ही बनाए गए हैं। बाकी पूरी कार्यकारिणी अभी भंग है। 

जिले में सपाइयों के कई गुट बने हैं, जो अलग-अलग बैठकें करते हैं, विरोध प्रदर्शन भी इनका अलग-अलग ही होता है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, पूर्व महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी, शहर विधायक रफीक अंसारी, विपिन मनोठिया का अलग ग्रुप है।
विज्ञापन


पूर्व कैबिनेट मंत्री व किठौर विधायक शाहिद मंजूर का अलग धड़ा है। जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह, सिवालखास विधायक गुलाम मोहम्मद, पूर्व मंत्री अब्बास, अयूब अंसारी और बाबर चौहान का अलग खेमा है। पूर्व विधायक योगेश वर्मा और उनकी पत्नी पूर्व महापौर सुनीता वर्मा का भी अपना अलग गुट है।
 

यह भी पढ़ें: Niukay Chunav: रालोद के खाते में खतौली और पुरकाजी सीट, चेहरों पर दांव, जलालाबाद से फिर अब्दुल गफ्फार को टिकट

महापौर सीट निकालने के लिए अतुल प्रधान को सबको साथ लेकर चलना होगा, तभी उनका चुनाव मजबूत होगा। गुटबंदी का आलम यह है कि जहां एक गुट जाता है, वहां दूसरा उस विरोध प्रदर्शन में या बैठक में शामिल नहीं होता है। छोटे स्तर पर भी ऐसे ही कई गुट और हैं। पार्टी को जिले में मजबूत बनाने में यह गुटबाजी कहीं न कहीं नुकसानदेह साबित हो सकती है। इसकी भनक सपा के आलाकमान को भी है। हालांकि अभी कोई सख्त निर्णय नहीं लिया गया है। 

जिलाध्यक्ष को लेकर भी पिछले करीब नौ माह से रस्साकशी चल रही थी। यही कारण रहा कि जिलाध्यक्ष चुनने में इतना समय लगा। पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह पर ही भरोसा जताया गया है। उनकी भी असली चुनौती अब शुरू होगी।

न सिर्फ विपक्ष की भूमिका का मेरठ में सही तरह से निर्वहन करना होगा, बल्कि पार्टी के सभी धड़ों को एकसूत्र में बांधना होगा। यह इतना आसान नहीं है। विभिन्न मुद्दों पर लड़ाई लड़कर जहां मेरठ में सपा के अस्तित्व को बचाए रखना है, तो वहीं अपनों को साधने की कड़ी चुनौती भी उनके सामने हैं। 

मजबूती से चुनाव लड़ेंगे 
सभी सपाई भाजपा की जनविरोधी नीतियों का विरोध कर रहे हैं। सभी पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। पार्टी को मजबूत कर रहे हैं। निकाय चुनाव में सभी जल्द ही एक मंच पर होंगे, एक साथ होंगे। मजबूती से चुनाव लड़ेंगे। - जयवीर सिंह, जिलाध्यक्ष, सपा

आखिरी समय में प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस, 16 तक होंगे आवेदन
निकाय चुनाव के मद्देनजर सियासी पारा चढ़ने लगा है। समाजवादी पार्टी ने जहां सरधना विधायक अतुल प्रधान की पत्नी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं आम आदमी पार्टी ने ऋचा सिंह पर दांव खेला है जबकि अन्य सियासी दल दावेदारों के नामों पर मंथन कर रहे हैं। कांग्रेस आखिरी समय यानि नामांकन के अंतिम दिन तक महापौर प्रत्याशी घोषित करने की रणनीति बना रही है। 

मेरठ का निकाय चुनाव सत्तारूढ़ पार्टी के लिए कभी मुफीद साबित नहीं हुआ। जब प्रदेश में सपा की सरकार रही तो महापौर भाजपा के बने। जब प्रदेश के साथ ही केंद्र में भी भाजपा काबिज रही तो बसपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा महापौर चुनी गईं। हालांकि बाद में बसपा सुप्रीमो द्वारा सुनीता वर्मा और उनके पति योगेश वर्मा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने पर  बाहर का रास्ता दिखा दिया था। अब दोनों ही सपा में हैं।

कांग्रेस के लिए महापौर की राह कभी आसान नहीं रही। अब भारत जोड़ो यात्रा के जरिए कांग्रेस अपने पक्ष में भी मजबूत स्थिति का आकलन कर रही है। जिलाध्यक्ष अविनाश काजला का कहना है कि कांग्रेस को जनसमर्थन मिल रहा है। यात्रा के बाद युवाओं का जोश बढ़ा है और कांग्रेस की ओर आस से देख रहे हैं। कांग्रेस के महासचिव संजीव शर्मा भी पार्टी पदाधिकारियों व दावेदारों से रूबरू हुए। 16 अप्रैल तक आवेदन लिए जाएंगे।
 

अंसारी या मलिक हो सकता है बसपा से महापौर प्रत्याशी
बहुजन समाज पार्टी मेरठ नगर निगम में महापौर की कुर्सी को गंवाना नहीं चाहती है। अंसारी या मलिक (तेली) समाज पर दांव लगा सकती है। 16 अप्रैल के बाद बसपा प्रत्याशी की घोषणा हो जाएगी। बसपा निकाय चुनावों से आगामी लोकसभा चुनावों की भूमि तैयार करने की बात कर रही है। बसपा से दावेदारों में चर्चित राशिद अखलाक के नाम को बसपा के जिलाध्यक्ष मोहित आनंद ने खारिज कर दिया है।

नगर निगम की कुर्सी पर तीन बार बसपा का कब्जा रहा है। इस बार निकाय चुनाव के बाद लोकसभा का चुनाव भी होना है, इसलिए बसपा मुस्लिम, दलित, पिछड़ों के वोट बैंक पर निगाहे गड़ाए बैठी है। मुस्लिम-दलित गठजोड़ को फिर से मजबूत करने की तैयारी है। पिछड़ी जातियों में केवल मुस्लिम समाज पर ही दांव लगाना पार्टी हित में मानकर चल रही है।

माना जा रहा है कि अगर बसपा का यह दांव कामयाब हुआ तो सपा को मुस्लिम वोटों में भारी नुकसान हो सकता है। सपा को निकाय चुनाव में मुस्लिम मतों के विभाजन का खामियाजा लोकसभा चुनावों में भी उठाना पड़ सकता है।

बसपा नेताओं के मुताबिक पार्टी बूथ स्तर पर काम कर रही है। जिसके आधार पर खासकर नगर निगम में बसपा महापौर सीट पर जीत का दावा कर रही है। सभी दलों से आवेदन मांगने वालों के नाम सामने आ रहे हैं लेकिन अभी तक बसपा के प्रत्याशियों के नाम सामने नहीं आए हैं। केवल राशिद अखलाक का ही बार बार नाम चर्चाओं में रहा है। 
विज्ञापन

बसपा जिलाध्यक्ष मोहिन आनंद का कहना है कि बसपा इस बार महापौर प्रत्याशी के रूप में अंसारी या फिर मलिक बिरादरी पर दांव लगाएगी।   

बसपा के संभावित प्रत्याशियों पर कार्रवाई करा रही भाजपा : आनंद 
बसपा जिलाध्यक्ष मोहिन आनंद ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि बसपा प्रत्याशियों के नाम सामने आते ही भाजपाई या तो उसका वोट खारिज करा रहे हैं या फिर अलग तरीके से उनका उत्पीड़न कर रहे हैं। फलावदा नगर पंचायत की तैयारी कर रहे बसपा के संभावित प्रत्याशी महेश सैनी का मतदाता सूची से नाम ही कटवा दिया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी से भी मिल चुके हैं। लोगों से संविधान में मिले चुनाव लड़ने के अधिकार को भी छीनने का प्रयास किया जा रहा है।

छुट्टी में भी 45 संभावित प्रत्याशियों के बने नोड्यूज
नगर निगम में आंबेडकर जयंती पर छुट्टी वाले दिन भी शुक्रवार को 45 संभावित प्रत्याशियों ने हाउस-जल कर जमा कर करके नोड्यूज बनवाए। निगम में वेबसाइट बंद है, जिसके चलते टैक्स जमा नहीं हो पा रहे थे। नगरायुक्त अमित पाल शर्मा के निर्देश पर हाउस-जल कर जमा करके संभावित प्रत्याशियों को पर्ची देकर नोड्यूज जारी हो रहे है।

बाद में इसी पर्ची के आधार पर वेबसाइट चलने पर सभी संभावित प्रत्याशियों की ऑनलाइन हाउस-जल कर जमा हो जाएंगे। नगरायुक्त ने गुरुवार को निर्देश जारी किया था कि नगर निगम में अधिकारी व सभी कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय में काम करेंगे। अधिकारियों व कर्मचारियों ने नगर आयुक्त के निर्देश नहीं माने।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें