कड़ाके की ठंड के साथ मनेगा नए साल का जश्न, बर्फीली हवाओं से अभी नहीं मिलेगी राहत
मोदीपुरम। नए साल का जश्न कड़ाके की ठंड के साथ मनेगा। मौसम विभाग के अनुसार अभी सर्दी से राहत के आसार नहीं हैं। 29 दिसंबर को बन रहे नए पश्चिमी विक्षोभ से 5 जनवरी तक ठंड का असर ऐसे ही बना रहेगा। बर्फीली हवाएं भी परेशान करेंगी।
पिछले एक सप्ताह से लगातार बढ़ती ठंड ने शहरवासियों को घरों में कैद कर दिया है। मंगलवार का दिन भी सुबह से ही सर्दी से भरा रहा। तेज बर्फीली हवाओं के साथ सुबह हल्का कोहरा रहा। करीब 12 से 14 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। अधिकतम तापमान 15.7 और न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। अधिकतम तापमान सामान्य से 8 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. यूपी शाही का कहना है कि अभी बर्फीली हवाओं का दौर बना रहेगा। सुबह के समय हल्का कोहरा रहेगा, जबकि दिन में हवा चलने से मौसम काफी सर्द रहेगा। 29 दिसंबर से फिर नया पश्चिमी विक्षोभ बन रहा है, जिस कारण 5 जनवरी तक ठंड ऐसी ही बनी रहेगी।
बहुत खराब श्रेणी में पहुंचा एक्यूआई
मंगलवार को मेरठ के वायु गुणवत्ता सूचकांक में भी बढ़ोतरी हुई है। एक्यूआई 284 दर्ज किया गया। जयभीमनगर का 144, गंगानगर 344 और पलवपुरम का 364 रहा। पल्लवपुरम और गंगागनगर का एक्यूआई 300 को पार कर बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया है।
शीतलहर व पाले से फसलों को कैसे होता है नुकसान
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर का कहना है कि शीतलहर व पाले से फसलों व फलदार पेड़ों की उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। फसलों में फूल, बालियां व फलियां आने या उनके विकसित होने के समय पाला पड़ने की सबसे ज्यादा संभावनाएं रहती हैं। पाले के प्रभाव से पौधों की पत्तियां और फूल झुलसने लगते हैं। पाला पड़ने के दौरान अगर फसल की देखभाल नहीं की जाए तो उस पर आने वाले फल या फूल झड़ सकते हैं। अगर शीतलहर हवा के रूप में चलती रहे तो उससे कोई नुकसान नहीं होता है, लेकिन हवा रुक जाए तो पाला पड़ता है, जो फसलों के लिए नुकसानदायक होता है। बढ़ती सर्दी सबसे ज्यादा आलू की फसल को नुकसान पहुंचाती है। आलू की फसल में झुलसा रोग आ सकता है, जबकि गेहूं के लिए यह सर्दी सबसे अच्छी होगी।