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त्याग की शिक्षा प्रकृति से लें : मुनिश्री

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पयूर्षण पर्व में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। - फोटो : MAWANA
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त्याग की शिक्षा प्रकृति से लें : मुनि श्री
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हस्तिनापुर। श्री दिगम्बर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में समवशरण महामंडल विधान की विधिवत मांगलिक क्रियाएं भगवान जिनेंद्र के अभिषेक एवं शांतिधारा से प्रारंभ हुई। समोशरण जिनालय में मंगलाष्टक के साथ विधानाचार्य पं.आशीष जैन शास्त्री ने विधान की क्रियाएं प्रारंभ कराई। भगवान मल्लिनाथ को बेदिका से सौधर्म इंद्र मुकेश जैन को यज्ञनायक रमेश चंद व अन्य इंद्रों के साथ संगीत की स्वर लहरियों पर जयघोष करते हुए समवशरण जिनालय की तीन प्रदक्षिणा करके पांडुक शिला पर विराजमान किया। शांतिधारा सुशील जैन, राजरानी जैन, गौरव, अनुुभूति जैन को प्राप्त हुआ। मुनि श्री 108 भाव भूषण महाराज ने पर्यूषण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग पर प्रवचन करते हुए कहा कि त्याग कि शिक्षा हमें प्रकृति से लेनी चाहिए। वृक्ष कार्बनडाई आक्साइड ग्रहण और हमें आक्सीजन प्रदान करते है। गाय घास आदि खा करके हमें दूध प्रदान करती है। वृक्ष अपने पत्तों को एक समय स्वयं छोड़ देता है। हम भी आहार करते है तो निहार होता है तभी मनुष्य स्वस्थ रहता है। उत्तम त्याग समस्त संसार में श्रेष्ठ है ये औषधि दान, शास्त्र दान, अभय दान एवं आहार दान के रूप में व्यवहार में लाया जाता है। इस दौरान मंत्री राजेंद्र कुमार जैन, विजय कुमार जैन, मंत्री प्रद्युमन जैन आदि मौजूद रहे।
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