फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut News: संकरी गलियां और बहुमंजिला मकान, हादसे से बचने का नहीं इंतजाम

विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। शहर में हाईवे का जाल बिछ रहा है। रैपिड मेरठ साउथ स्टेशन तक आ चुकी है और मेट्रो भी चलने वाली है। इन सब सुविधाओं से इतर शहर के भीतर का हाल बेहाल है। पुराने शहर में महज तीन-चार फुट की गलियों में पुराने बहुमंजिला मकान खड़े हैं। मकानों के दूसरे तल भी ऊपर से इतने मिल गए हैं कि रोशनी आना भी मुश्किल है। शहर में तेजी से बहुमंजिला (हाई रेज बिल्डिंग) इमारतों में रहने का चलन बढ़ गया है। शहर में लगातार ऐसी सोसायटी बन रही हैं। इनमें ऊपरी तल पर आग लग जाए तो इसे बुझाने के पर्याप्त इंतजाम तक विभागों के पास नहीं हैं। ऐसे हालात हैं कि हादसा हो जाए तो जान बचाने का पुख्ता इंतजाम नहीं। जिम्मेदार अधिकारियों ने भी लोगों को उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया है।
विज्ञापन

हापुड़ रोड से मदीना मस्जिद के बराबर होते हुए करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर संकरी गलियों के बीच 300 गज के हादसाग्रस्त मकान की हालत खस्ता थी। आसपास के लोगों के मुताबिक मकान बहुत पुराना था और पिलर भी नहीं थे, जिसके चलते कुछ दिन से हुई बारिश के कारण यह भरभराकर गिर गया। बचाव कार्य के लिए पहुंचा जिला प्रशासन का अमला और एनडीआरएफ व एसडीआरएफ संकरी गलियों के बीच होकर जैसे-तैसे मौके पर पहुंचे। ऐसी गलियों में बचाव कार्य भी बेहद मुश्किल है।



दूसरी ओर पुराने शहर के अंतर्गत लाला का बाजार, पत्थर वालान, शीश महल, बाबा खाकी, राजो की कुइयां, गुदड़ी बाजार, नक्कार चियान, कैंचियान, स्वामी पाड़ा, ठठेरवाड़ा, कृष्णा पाड़ा, वैदवाड़ा, कोटला, वैली बाजार, सराय बहलीम, खैरनगर, सर्राफा बाजार, भगत सिंह मार्केट आदि तमाम इलाकों के कुछ भाग तो ऐसे हैं, जहां दो वाहन तक एक-साथ नहीं निकल सकते। इसके बावजूद इनमें बहुमंजिला मार्केट बन गई हैं। इन क्षेत्रों में हादसे होने पर कई बार बचाव राहत कार्य पहुंचने में ही पसीने छूट जाते हैं। अग्निशमन विभाग के पास इन संकरे क्षेत्रों और हाइरेज बिल्डिंग में आग से निपटने के भी पर्याप्त साधन नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें