मोदीपुरम। रुड़की रोड स्थित इंद्रलोक कॉलोनी पार्क में श्रीराम कथा के तीसरे दिन मानस व्याख्याता धर्ममूर्ति ने भगवान शिव -पार्वती विवाह प्रसंग पर विस्तार से रोशनी डाली। बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था। भोग और अहंकार को उन्होंने भक्ति का दुश्मन बताया। उनका कहना था कि जब तक इच्छाएं, अहंकार और भोग हैं, तब तक शिव प्रकट नहीं होते। तप का अर्थ केवल उपवास नहीं, बल्कि इंद्रियों का संयम है। शिव शुरुआत में विवाह नहीं करना चाहते थे, क्योंकि आत्मा स्वयं में पूर्ण है। उसे संसार से कोई आवश्यकता नहीं। जब शक्ति तप के बाद शुद्ध होकर आती है तो आत्मा और शक्ति का मिलन संभव होता है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भजनों पर नृत्य किया। संवाद