मेरठ। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बृहस्पतिवार को हस्तिनापुर में जलमग्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि बैराज से 216418 लाख क्यूसेक पानी का निस्तारण किया जा रहा है। जनपद में गंगा नदी के किनारे कोई विभागीय तटबंध नहीं है। स्थानीय किसानों ने एक कार सेवा बन्ध (लगभग 6 किमी लंबाई में) निर्माण किया हुआ है।
यह तटबंध सुरक्षा की दृष्टिगत से साध्य नहीं है और मानक के अनुरूप बना न होने के कारण एवं गंगा नदी में बढ़ रहे जलस्तर के फलस्वरूप ग्राम फतेहपुर प्रेम के नजदीक कट गया है। इस कारण आसपास के 15 गांवों की जमीन जलमग्न हो गई है। बाढ़ की वर्तमान स्थिति के दृष्टिगत आबादी के अन्यत्र सुरक्षित स्थल पर शिफ्ट करने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए हस्तिनापुर तटबंध निर्माण की एक परियोजना स्वीकृत हो चुकी है। बाढ़ काल के पश्चात परियोजना पर कार्य कराया जाना प्रस्तावित है। हस्तिनापुर क्षेत्र में 6 बाढ़ चौकियां स्थापित हैं, जिसमें सभी को अलर्ट मोड पर कर दिया गया है।
पीएसी और एसडीआरएफ टीम तैनात की गई हैं। पर्याप्त मात्रा में नाव टीम के पास हैं, फिर भी इसके अतिरिक्त नावों के लिए वन विभाग एवं निजी नाविकों से भी समन्वय स्थापित किया गया है। 12 राहत शेल्टर होम चिन्हित हैं। पशुओं के लिए आश्रय स्थल और चारे की व्यवस्था की गई है। गोताखोर और पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं। अपर जिलाधिकारी को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है।