चंदा इकट्ठा कर करेंगे केस की पैरवी
कुछ लोगों ने यह भी तय किया कि दंगा पीड़ितों की कमेटी में गांव में रहने वाले लोगों के अलावा उन्हें भी शामिल किया जाएगा जो दंगे के बाद पलायन कर चुके हैं। उनसे फोन पर संपर्क किया जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो उनके घर जाकर संपर्क किया जाएगा। सभी मिलकर केस लड़ेंगे। हाईकोर्ट में पैरवी के दौरान जो भी खर्च होगा वह कोई एक व्यक्ति नहीं देगा। जरूरत के हिसाब से चंदा इकट्ठा किया जाएगा।
कोर्ट को फाइल पर जो तथ्य मिले उसके हिसाब से फैसला सुनाया गया है, लेकिन इस प्रकरण में कई और तथ्य थे। जिस व्यक्ति को गोली लगी थी, उसने भी बयान दिए थे। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घायलों की रिपोर्ट भी फाइल पर थी। मैंने अभी कोर्ट का फैसला नहीं पढ़ा है। फैसले की काॅपी लेकर उस पर मंथन किया जाएगा। मलियाना के लोग तय करेंगे कि आगे क्या करना है। अगर वह हाईकोर्ट में अपील करने के लिए कहेंगे तो पूरी मजबूती के साथ पैरवी की जाएगी। - अलाउद्दीन सिद्दीकी, दंगा पीड़ितों के अधिवक्ता