जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे माहौल में वे काम नहीं कर सकते। न तो सुरक्षा है और न ही उनकी शिकायत पर पुलिस कोई कार्रवाई कर रही है। घटना के 24 घंटे बाद भी मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। इमरजेंसी में लगे सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। इस वजह से फुटेज तक नहीं मिली है। वहीं, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान हैं। तीमारदार, मरीजों को इमरजेंसी से निकालकर दूसरे अस्पताल या वार्ड में शिफ्ट कर रहे हैं। सीनियर डॉक्टर इमरजेंसी में लगाए हुए हैं, लेकिन व्यवस्था नहीं बन पा रही है।
शाम करीब चार बजे भावनपुर निवासी अंकुर, भाई अरुण को पथरी के दर्द की शिकायत पर कार से इमरजेंसी लेकर आए थे। इस दौरान जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि दूसरे गेट से अंदर जाइये। इस मुख्य गेट से नहीं, जिसके बाहर वे धरना दे रहे हैं। इस पर उनकी कहासुनी हो गई।
इसके बाद अंकुर वहां से जाने लगे, लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें कार से खींच लिया। उन्हें लात-घूंसों और बेल्ट से खूब पीटा। अरुण को भी कार से खींचने की कोशिश की। उनकी कार का गेट तोड़ दिया। इस दौरान पुलिस वहां मौजूद थी। पुलिस ने रोकने की कोशिश की, मगर वे नहीं मानें। अरुण शिकायत करने मेडिकल थाने गए, मगर वहां भी उनकी सुनवाई नहीं हुई।
यह है मामला
मवाना के भैंसा निवासी कविता (46) का पीएल शर्मा जिला अस्पताल में गर्भाशय का ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद उनकी तबियत बिगड़ गई थी। उन्हें सोमवार रात मेडिकल कॉलेज लाया गया था, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इस पर महिला के बेटे ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया और इंटर्न को पीटने लगे। जूनियर डॉक्टर मनीष इंटर्न को बचाने आए तो महिला के पुत्र ने मनीष के सिर में ऑक्सीजन सिलिंडर खोलने वाली रिंच मार दी, जिससे उनका सिर फूट गया। आरोपी भाग गया, जबकि उसके साथ रहे युवक को जूनियर डॉक्टरों ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। डॉ. मनीष को 20 टांके आए। उनका उपचार चल रहा है। इससे नाराज जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं ठप कर दीं और धरना-प्रदर्शन करने लगे। डॉ. मनीष ने मेडिकल थाने में महिला के पुत्र और उसके साथी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नाम का उल्लेख नहीं किया गया था। महिला का शव परिजन वहीं छोड़कर चले गए थे।