यह उठ रहे सवाल
पहला सवाल यह है कि जब छह लोगों के पास कार्ड मिल गए थे तो चार के पास कार्ड क्यों नहीं मिले। यदि उनके कार्ड खो भी गए थे तो उसका कोई तो सबूत पुलिस को दिखा सकते थे। दूसरा सवाल यह है कि जब चार लोगों को कार्ड दिखाने के लिए समय दिया गया तो उन पर पुलिस ने नजर क्यों नहीं रखी। आखिरकार सभी को चकमा देकर पूरा परिवार कैसे फरार हो गया। तीसरा और अहम सवाल यह है कि फरार होने के बाद भी अभी तक कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई।
यह था मामला
24 जुलाई को एटीएस मेरठ और मुरादाबाद की टीम ने अल्लीपुर गांव नसीम के मकान पर छापा मारा था। यहां म्यांमार के मोंडू जिला निवासी मूसा कलीम अपने परिवार के 10 सदस्यों के साथ किराये पर रहता था। रोहिंग्या परिवार के छह सदस्यों ने यूएनएचसीआर कार्ड दिखा दिया था, जबकि चार लोगों के पास कार्ड नहीं था।
ऐसे में उन्हें कार्ड दिखाने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया गया था। परिवार करीब 12 साल से यहां किराये पर रह रहा था। कई वर्ष तक पूर्व प्रधान के मकान में भी रहा। एक माह पहले यह परिवार नसीम के मकान में किराये पर रहने के लिए आ गया था। परिवार के कई सदस्य मीट फैक्ट्रियों में काम करते थे।
इस मामले की जानकारी मिली है। उच्च अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को भी इससे अवगत करा दिया गया है। पूरे परिवार की तलाश की जा रही है। - राजीव कुमार, एसओ खरखौदा