एलएलआरएम मेडिकल के ब्लड बैंक में एक जनवरी 2022 से 31 जनवरी 2023 तक 246 रक्तदाता बीमार मिले हैं, उनमें छह एचआईवी पॉजिटिव हैं। 116 हेपेटाइटिस सी और 124 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित पाए गए। वहीं, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की रिपोर्ट में 82 बीमार मिले। इनमें सात लोग एचआईवी पॉजिटिव, 43 हेपेटाइटिस सी और 32 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित निकले। जांच के बाद बीमार लोगों का खून नष्ट कर दिया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन लोगों से संपर्क किया और इलाज शुरू कराया है। जिनका इलाज कुछ समय से चल रहा है, वे पहले से काफी ठीक हैं।
समय पर इलाज से ठीक हो सकता है हेपेटाइटिस-सी
मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस सी (यकृतशोथ ग) इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता। इस कारण यह जानलेवा हो जाती है। मेडिकल में इसका इलाज नि:शुल्क किया जा रहा है।
जानलेवा है हेपेटाइटिस-बी
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस बी (यकृतशोथ बी) एक संक्रामक बीमारी है। इसके कारण लीवर की सूजन और जलन पैदा होती है। इसके वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में जाने से होता है। इसका इलाज वायरस रोधी दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं खून में वायरस की मात्रा घटा सकती हैं या उन्हें हटा सकती हैं, जिससे लीवर सिरोसिस या लीवर कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है एचआईवी
मेडिकल के एंटी रिट्रो वायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर के प्रभारी रहे वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य ने बताया कि एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है, जिसकी वजह से एड्स होता है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। जिस इंसान में इस वायरस की मौजूदगी होती है, उसे एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ही एड्स समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। एचआईवी के शरीर में दाखिल होने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर पर तरह-तरह की बीमारियां और इंफेक्शन पैदा करने वाले वायरस अटैक करने लगते हैं। एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8-10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है। वैसे, एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद से एड्स होने तक के अंतराल को दवाओं की मदद से बढ़ाया जा सकता है और कुछ बीमारियों को ठीक भी किया जा सकता है। मेडिकल के एआरटी सेंटर में इसका इलाज किया जाता है।
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इन कारणों से होती हैं ये बीमारियां
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना।
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल।
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा।
- दूषित सुईं से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना।
- असुरक्षित यौन संबंध।
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सतर्क रहें तो नहीं है खतरा
कोई भी ऐसा कार्य या गतिविधि जिसमें खून से खून का संपर्क होने की संभावना है, संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है। अगर सावधानी बरतें, तो इन बीमारियों से बचे रह सकते हैं।