इससे पहले गोष्ठी के दूसरे दिन किसानों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत की मिट्टी अनमोल है। इतनी उपजाऊ मिट्टी किसी देश की नहीं है, जितनी यहां की है। यह मिट्टी हमारी प्राचीन सभ्यता की देन है। भागवत ने कहा कि हमारे देश की मिट्टी में किसानों के हितों के लिए कई पोषक तत्वों से भरपूर है। किसान सिर्फ अपने हितों के लिए खेती नहीं करते, बल्कि वह पूरे देश के लोगों के हितों को देखते हुए खेती करते हैं। कठिन परिश्रम कर धान, गेहूं और अन्य फसल उगाते हैं। जबकि व्यापार में ऐसा नहीं है। व्यापार लोग सिर्फ अपने लिए करते हैं। इससे पूर्व पहले सत्र में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बद्री नारायण चौधरी, राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र, कार्यकारिणी अध्यक्ष हुकमचंद पाटीदार सहित कई पदाधिकारी ने जैविक खेती के संबंध में संबोधित किया।
किसान बोले- गो आधारित कृषि से दोगुनी हुई आय
कार्यक्रम में तमिलनाडु से आए किसान राम स्वामी ने बताया कि वह अपनी 25 एकड़ भूमि पर पिछले दस वर्षों से गो आधारित कृषि कर रहा है, जिसकी आय रासायनिक खेती से दोगुना हो चुकी है। कर्नाटक से आए किसान रमेश राजू ने बताया कि वह 20 एकड़ भूमि में विभिन्न प्रकार की खेती करते हैं, जो पूरी तरह गो आधारित एवं जैविक है। उन्होंने पिछले 20 वर्षों से नारियल, सुपारी, काॅफी, संतरा, आम सहित करीब तीन दर्जन फलों की खेती करते आ रहे हैं। वह जैविक खेती में करीब 50 मजदूरों को हर रोज काम देते हैं। ओडिसा से आए किसान ज्ञानेंद्र नायक ने बताया कि वह 2002 से धान की खेती कर रहे हैं। 10 किस्म की धान अपने खेतों में पैदा की है। पिछले 22 वर्षों में उन्होंने अपने खेतों में पेस्टिसाइड का प्रयोग नहीं किया है, जिससे उनकी भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ उनकी आय भी बढ़ गई है। आंध्र प्रदेश से आए किसान रामकृष्ण मूर्ति ने बताया कि उनके यहां बारिश बहुत कम होती है और पेड़ों की भी संख्या कम है।
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