उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब एक साल से भी कम समय बचा है। राज्य के राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में, अमर उजाला की टीम ने 'सक्षम यूपी' कार्यक्रम के तहत मेरठ जिले का दौरा किया है। इस पड़ताल का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े असर और सरकार के विकास के दावों की असल तस्वीर समझना था। यह दौरा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी हकीकत टटोलने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीम ने सरकारी नीतियों के स्थानीय लोगों पर पड़े प्रभाव को समझा। विभिन्न क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों की गहन समीक्षा की। स्थानीय लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को भी जाना।
पहले और अब में कितना बदला स्पोर्ट्स गुड्स का कारोबार
एमडीएनआई एसोसिएशन अध्यक्ष अनिल पुंडीर ने बताया कि जब मैंने बीटेक को पास आउट किया, तो रेलवे में नौकरी करने के बाद में मैं एक कंपनी में जाता हूं इंस्पेक्शन के लिए। क्वालिटी कंट्रोल तो वहां पर मैं देखा। हम लोगों ने चार साल में अपने बीटेक में पढ़ी थी। उन सबका मुझे इंस्पेक्शन करना था। तो मैंने उसी दिन ठान लिया कि मुझे यह काम छोड़ के अब मुझे अपना ही कुछ काम शुरू करना है। तो मैंने 20 गज की एक छोटी सी फैक्ट्री से अपनी शुरुआत की। वो 20 गज की फैक्ट्री आज लगभग 14-1500 गज की फैक्ट्री बन गई है। जब हम स्पोर्ट्स में आए। स्पोर्ट्स में हमारा मेरठ जो है वो ओडीओपी में आता है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में आता है। हम स्पोर्ट्स के ही व्यापारी हैं। इस टाइम जो भी हमें एमएसएमई की तरफ से या डीआईसी की तरफ से जितने भी हमें योजनाएं मिलती हैं। उन योजनाओं से हमें बहुत लाभ मिला है। अगर हम ओडीओपी की बात करें तो गवर्नमेंट की तरफ इसमें 20% से लेकर 40% तक की सब्सिडी आती है। शर्त उसमें यह होती है कि वो इंडस्ट्री आपको 2 साल के लिए रन करके दिखानी होगी। उसकी टर्नओवर अच्छी होनी चाहिए। हर एंगल से एकदम से बिल्कुल फर्स्ट क्लास होनी चाहिए। तभी वह आपको ओडीओपी का लाभ मिलेगा। किसी वजह से अगर आप 2 साल से पहले अपनी इंडस्ट्री को शट ऑफ कर देते हैं तो फिर आपको वो सब्सिडी नहीं मिलेगी।
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मेरठ में बन रही स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, कितना मिलेगा प्रतिभागियों को लाभ
मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत ने बताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर जो बनाया जा रहा है वो जरूरत के हिसाब से हो रहा है। जिसे कहते हैं 'स्टेट ऑफ द आर्ट'। यह बहुत अच्छे मानकों के हिसाब से बनाया जा रहा है। क्योंकि उत्तर प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी है। हम चाहते हैं इसमें जो भी आधुनिक, जो भी हम उन्हें सुविधाएं दे सके। वो उसमें उपलब्ध होनी चाहिए। भारत में 14 स्पोर्ट्स खेल विश्वविद्यालय हैं। जिनमें से पांच विश्वविद्यालय, जो अभी पूरी तरह से काम नहीं कर रहे। बाकी नौ विश्वविद्यालय अच्छी तरह से काम कर रहे हैं। इसमें जो पढ़ाई है। वह सारी स्पोर्ट स्पेसिफिक होती है। खेल खिलाड़ी जब खेलता है तो उसको और सुविधाओं की भी जरूरत है अपनी परफॉर्मेंस को एनहांस करने के लिए। जैसे स्पोर्ट्स साइंस का बहुत महत्वपूर्ण रोल है। स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, एनालिटिक्स एंड डाटा ड्रिवन ट्रेनिंग जिसे कहते हैं। हम मेथोडोलॉजी उसके बिना आप ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल नहीं ले सकते। हमारा यह मानना है कि हम जो कोर्सेस चलाएं। यहां पर वो फिजिकल एजुकेशन तो एक बेसिक रिक्वायरमेंट है। जिसको आप कहते हैं उसमें कोर्सेस होते हैं। बीपीड, एमपीड, बीपीएस, एमपीएस, योगा एडप्टिव स्पोर्ट्स एजुकेशन, पैरा स्पोर्ट्स एजुकेशन, ये हम सारे कोर्सर्सेस उसमें लेकर चल रहे हैं। इसके साथ-साथ एक-एक साल के डिप्लोमा भी हम कराएंगे। 22 डिप्लोमा कोर्सेज होंगे। खेल स्पोर्ट्स कोचिंग के अंदर कुछ डिप्लोमा कोर्सेज होंगे। जर्नलिज्म में, योगा में है, डिप्लोमा इन फिजिकल एजुकेशन। हमारा एक प्लान है। करीबन हम 60 डिग्री डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज यहां पर हम चलाएंगे। एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का काम सिर्फ खेल शिक्षा ही नहीं है।
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मेरठ से प्रयागराज तक बने गांग एक्सप्रेसवे के आम लोगों का कितना हुआ फायदा
मेरठ के कार्यकारी अभियंता राकेश मोगा ने बताया कि मेरठ में तो बड़ा लोगों में उत्साह बहुत है। एक तो क्वालिटी से, जो क्वालिटी हमने दी है। जैसा लोग बता रहे हैं कि अभी आसपास उन्होंने कहीं देखी नहीं है। तो लोग बड़े उत्साहित हैं। सबसे बड़ी बात है कि निर्माण की जो उच्च गुणवत्ता है। उससे लोग बड़े प्रभावित हैं। हमारी 120 की स्पीड अलाउ है तो लोग उसको महसूस भी नहीं कर पा रहे हैं। वो गलती से क्रॉस भी कर पा रहे हैं। तो ये हमारे लिए अचीवमेंट भी है। लेकिन सुरक्षा की चिंता भी है। जैसे हमारा अपना शरीर है और ईश्वर ने हम लोगों को अंदर क्या दिया है? खून चलाने के लिए नसे दी हैं। जितनी ब्लॉक हो जाएंगी उतना शरीर आपका कैसा होगा? परेशान रहेगा। कभी यहां बीमारी कभी वहां आपका पूरा संचार सही रहेगा। तो आपका पूरा शरीर स्वस्थ रहेगा। ऐसे ही प्रदेश में अगर हमारी सड़कें हमारे नसे की तरह काम करेंगे। बिल्कुल फ्री फ्लो ट्रैफिक हो तो ना जाम की समस्या है। समय की बचत है। हर चीज में बचत है। आज के माहौल में जैसे आपका पेट्रोल-डीजल का थोड़ा सा संयम बरतने की बात। सड़कें बहुत जरूरी है। जहां आपको वेस्टेज ना हो। आप किसी तरीके से भी जाम ना लगे, आपका टाइम बचे, तो प्रदेश का और इस सरकार का तो बहुत बड़ा योगदान है। उसमें हम शायद इंडिया में पहले नंबर के हैं। एक्सप्रेसवे के मामले में अब हो गए। यह बड़ी उपलब्धि है। पहले लखनऊ जाने की भी नहीं सोच पा रहे थे। अब वो एक्सप्रेसवे से संभल गए। वापस आ गए। मेरठ के लोग यहां से लखनऊ भी जा रहे हैं और उसी दिन वापस भी आ रहे हैं। तो ये कितना तरक्की हुई जहां हम एक दिन सोचते थे। लखनऊ का मतलब, प्रयागराज का मतलब की आप चार दिन का ट्रिप होता था। अब आप प्रयागराज से भी वापस आ जाएंगे।
मेरठ निवासी उमेश त्यागी ने बताया कि बहुत बढ़िया है। स्पीड से कम समय में दूरी तय हो रही है। एक अन्य स्थानीय यात्री ने बताया कि आज हम मेरठ से गढ़ जा रहे हैं। मैं पहली बार ही इस गंगा एक्सप्रेस पर चढ़ा हूं। यहां स्वर्ग से भी अच्छा महसूस हो रहा है। जो घंटे की दूरी थी अब वो मिनटों में दूरी तय हो रही है।
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