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ममता शर्मशार: नौ माह दर्द सहा, पैदा होते ही जुदा किया, डंपिंग ग्राउंड में बैग में तड़पती मिली 12 घंटे की मासूम

Sat, 04 Mar 2023 11:14 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में एक बार फिर से मां की ममता शर्मसार हो गई। यहां जिस मासूम के लिए मां ने नौ माह तक दर्द सहा लेकिन जब वह पैदा हुई तो उसे खुद से जुदा कर दिया।  शुक्रवार को नवजात लोहियानगर के डंपिंग ग्राउंड में एक बैग में तड़पती मिली।
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नवजात को कूड़े में फेंका - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मां... मैं तो तुम्हारा अंश थी। मुझे ऐसे मरने के लिए क्यों छोड़ दिया। आपने मेरे लिए नौ महीने दर्द सहे, फिर ऐसी क्या मजबूरी थी जो इस कदर अपने से जुदा कर दिया। यह पुकार लोहियानगर के डंपिंग ग्राउंड में शुक्रवार को मिली एक नवजात की है। वह अभी बोल नहीं सकती, लेकिन उसके यह सवाल मां के साथ समाज से भी हैं। इस नन्ही जान को बैग में बंद करके कूड़े के ढेर पर फेंक दिया। गनीमत रही कि कूड़ा बीनने वाले बच्चों ने उसके रोने की आवाज सुन ली... वरना ये मासूम भूखे कुत्तों का निवाला बन जाती। 

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रोजाना की तरह लोहिया नगर स्थित डंपिंग ग्राउंड में कुछ बच्चे कूड़ा बीन रहे थे। अचानक उन्होंने कूड़े के ढेर में एक बच्ची के रोने की आवाज सुनी। उन्होंने देखा कि आवाज एक बैग से आ रही थी। बैग खोला तो सभी अवाक रह गए। कपड़े में एक नवजात बच्ची लिपटी हुई थी।

थोड़ी देर होती तो भूखे कुत्ते मासूम को बना डालते निवाला
सूचना पर पहुंची खरखौदा पुलिस ने बच्ची को एक निजी अस्पताल की नर्सरी में भर्ती कराया। पुलिस ने बच्ची का इलाज अपने खर्च पर कराया। चिकित्सकों का कहना है कि बच्ची का जन्म 12 घंटे पहले हुआ है। लोगों ने बताया कि अगर कूड़ा बीनने वाले बच्चों को रोने की आवाज नहीं आती तो यहां पर मांस के लोथड़े की वजह से आने वाले भूखे कुत्ते उसको नोंचकर खा जाते।

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खरखौदा थाना प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी को सूचना दे दी गई है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी देखी जा रही है। वहीं देर रात सीएमओ अखिलेश मोहन अस्पताल पहुंचे और बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उन्होंने बताया कि बच्ची स्वस्थ है। 

बच्ची को गोद लेने वालों का लगा तांता
एक तरफ जहां किसी परिवार ने बच्ची को मरने के लिए फेंक दिया, वहीं ऐसे लोग भी बड़ी संख्या में बच्ची को लेने पहुंच गए, जिनके बच्चे नहीं हैं। पुलिस चौकी पर पहुंचे ये लोग बच्ची को गोद लेने की इच्छा जता रहे थे। हर किसी की जुबां से बस एक ही शब्द निकल रहा था कि कोई एक मासूम बच्ची के साथ ऐसा कैसे कर सकता है।

एक साल में चाइल्ड लाइन को मिलीं पांच लावारिस बेटियां 
लोहियानगर में कूड़े के ढेर में बच्ची को पहली बार नहीं फेंका गया है। इससे पहले भी कई बार बच्ची को फेंका जा चुका है। एक साल में मेरठ में पांच बच्ची चाइल्ड लाइन को मिली हैं, जिनकी उम्र एक साल से कम है। दस बच्चियां ऐसी हैं जिनकी उम्र एक साल से अधिक है।

चाइल्ड लाइन बच्ची के मां-बाप को तलाशने का प्रयास करते हैं। समाज में इस तरह के मां-बाप हैं जो बेटी होने का दर्द इस रूप में बयान कर देते है। चाइल्ड लाइन की निदेशिका अनीता राणा ने बताया कि बच्ची चिकित्सकों की निगरानी में है। लावारिश मिले बच्चों की पूरी देखभाल की जाती है।
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