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Flood in Hastinapur: टापू बने दर्जनों गांव, घरों में पानी घुसने से भयभीत हुए लोग, ऐसे है मेरठ के हालात

Tue, 15 Aug 2023 05:29 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

Flood in Hastinapur : बाढ़ के पानी से दर्जनों गांव टापू बन गए हैं। वहीं, घरों में पानी घुसने से लोग भयभीत हो गए हैं। जानिए हस्तिनापुर के हालात कैसे हैं।
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हस्तिनापुर के गांवों में पहुंचा बाढ़ का पानी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिजनौर बैराज से छोड़े गए तीन लाख 90 हजार क्यूसेक पानी से हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों की हालत नाजुक हो गई हैं। गंगा का पानी गांव की गलियों तक पहुंच गया है, जिससे हजारों लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

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सोमवार को हरिद्वार के भीम गौड़ा बैराज और बिजनौर बैराज पर जलस्तर में भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं, मंगलवार की सुबह तक पानी ने खादर क्षेत्र के दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। वहीं, हरिपुर, दबखेड़ी, कुन्हेड़ा, रठौरा कला, लतीफपुर, किशनपुर, भीमकुंड, दुधली आदि दर्जनों गांव के घरों में पहुंच गया है। घरों में बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीण पूरी तरह डरे सहमे हुए हैं और अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। 

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उधर, दर्जनों गांवों के संपर्क मार्ग आपस में पूरी तरह बंद हो गए हैं। घरों में पानी भरने से ग्रामीण घरों की छतों पर या अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए निकल रहे हैं। मंगलवार की सुबह से ही गांव की ओर गंगा का पानी बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे ग्रामीण पूरी तरह भयभीत है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और बाढ़ जैसे हालात से निपटने के लिए पुख्ता तैयारी के दावे कर रहे हैं। 

ग्रामीणों का कहना है कि 13 बीती जुलाई को आई बाढ़ का पानी कई गांवों तक पहुंचा था, लेकिन अधिकतर गांव बाढ़ से सुरक्षित बच गए थे। अब मंगलवार सुबह को दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो गए तो दर्जनों गांव में पानी भर गया है, जिससे यहां ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। 

ग्रामीण गंगा का जलस्तर जानने के लिए लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। हालांकि हरिद्वार से गंगा के जलस्तर में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की इस बाढ़ ने उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। अब इस बाढ़ में ऊंचे स्थानों पर खड़ी फसल भी बर्बाद हो गई है।

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जीवन बचाने की जद्दोजहद
गांव में गंगा की बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीण अपने और अपने परिवार की जान को सुरक्षित बचाने की जद्दोजहद में है। ग्रामीणों का कहना है कि इतना पानी उन्होंने 2013 केदारनाथ प्रलय में देखा था। उसके बाद से 10 वर्षों में कभी इतना पानी खादर क्षेत्र में नहीं आया। वहीं, घर छोड़ने से उनके आगे खाने-पीने से लेकर पशुओं के रहने तक की परेशानियां आ खड़ी हो गईं हैं।

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