हस्तिनापुर से डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन आज अमेरिका के लिए रवाना हो गए। वह मेरिका जैन सेंटर ऑफ नार्दन कैलीर्फोनिया’’ सस्था द्वारा आमंत्रित किए गए हैं। वह वहां पर हस्तिनापुर के महत्व के साथ धर्म का प्रचार-प्रसार भी करेंगे।
हस्तिनापुर स्थित जंबूद्वीप की पावन प्रेरिका गणनी प्रमुख ज्ञानमती माता के आशीर्वाद से अमेरिका की जैन सेंटर ऑफ नार्दन कैलीर्फोनिया’’ सस्था द्वारा अतिविशिष्ट स्कॉलर के रूप में आमंत्रित किए गए डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन आज अमेरिका के लिए रवाना हो गए जहां पर पहुंचकर वह हस्तिनापुर का प्राचीन महत्व और जैन धर्म का प्रचार प्रसार करेंगे।
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जम्बूद्वीप संस्थान के प्रबंध मंत्री डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने बताया कि वह अमेरिका में धर्मप्रभावना के लिए प्रस्थान कर रहे हैै। वे अमेरिका में कैलीर्फोनिया जाकर हस्तिनापुर नगरी के प्राचीन महत्व महत्व को जन-जन में पहुॅंचायेंगे और जैनधर्म के परिप्रेक्ष्य में धर्म का प्रचार-प्रसार करेंगे।
डॉ जीवन प्रकाश आगामी 31 अगस्त से होने वाले जैनधर्म के सबसे बड़े दशलक्षण महापर्व के अवसर पर अमेरिका के ‘‘जैन सेंटर ऑफ नार्दन कैलीर्फोनिया’’ द्वारा अतिविशिष्ट स्कॉलर के रूप में आमंत्रित किया गया हैं। जहां पर वह एकमात्र वक्ता के रूप में लगातार 10 सितम्बर तक अमेरिका में मौजूद लोगों के बीच में रहकर जैनधर्म के विभिन्न पहलुओं पर अपने अभिभाषण रखेंगे। जिससे अमेरिका में सिर्फ हस्तिनापुर का ही नहीं भारत का भी मान सम्मान और बढ़ेगा और वहां के लोगों में भारत की प्राचीन संस्कृति के बारे में जानकार धार्मिक भावनाएं पैदा होंगी।
कार्यक्रम के अनुसार वह दिल्ली से सैनफ्रेसिस्को जायेंगे और वहां बने जैन सेंटर पर उनके द्वारा विविध कार्यशालाएं सम्पन्न होंगी। डॉ जीवन प्रकाश के विदेश प्रस्थान को लेकर दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान ने इसे संस्थान की स्वर्ण जयंती की उपलब्धि माना और जम्बूद्वीप संस्थान के विगत 50 वर्षोें के अनेकानेक कार्यकलापों को विदेश में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए अमेरिका भेजा। अमेरिका में धर्म के प्रति लोगों को जागरूक करने के बाद उनका 13 सितंबर को भारत में पुर्नआगमन होगा।
उनके प्रस्थान पर सर्वोच्च जैन साध्वी ज्ञानमती माताजी, चंदनामती माता व पीठाधीश स्वस्ति रवीन्द्रकीर्ति स्वामी ने विशेष मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। साथ ही संस्थान के पदाधिकारियों और भक्तों ने अभिवंदन के साथ माल्यार्पण, तिलक आदि करके उनकी सफल विदेश यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी अर्पित कीं। साथ ही ज्ञानमती माता, चंदनामती माता एवं पीठाधीश स्वामी ने भी विदेश के सभी रहवासियों के लिए लिखित संदेश के माध्यम से अपना आशीर्वाद प्रेषित किया।
पीठाधीश स्वस्ति रवीन्द्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि हस्तिनापुर एक ऐतिहासिक और धर्मपरायण नगरी है। यहां जैनधर्म के 16वें-17वें और 18वें तीर्थंकरों का जन्म हुआ है। इसके साथ ही माना जाता है कि युग के प्रारंभ में जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का प्रथम आहार भी इसी हस्तिनापुर में हुआ है। अतः जैनधर्म की बात करें या वैदिक धर्म के द्वारा कौरवों और पाण्डवों की बात करें, यहीं पर पांडवों ने पूरे देश पर शासन किया इसी पावन भूमि पर कई ऋषि-मुनियों ने सैकड़ों वर्षों तक तपस्या की है। सदा ही इस तीर्थभूमि से धर्म की प्रभावना हुई है। और अहिंसा के साथ न्याय को भी जहां महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है। ऐसी हस्तिनापुर नगरी आज पूरे विश्व के समक्ष अहिंसा, न्याय, सत्य, त्याग, संयम, तपस्या और आपसी प्रेम-सामंजस्य जैसे सिद्धान्तों की एक आदर्श भूमि है।