सहारनपुर। चीनी का कटोरा कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना समितियां राजनीति का केंद्र रही हैं। सहारनपुर गन्ना विकास समिति के अखाड़े से निकलकर कई दिग्गज विधानसभा से लेकर संसद तक पहुंचे हैं। इस समिति में रहे पदाधिकारियों में से एक सांसद और चार विधायक रहे हैं। जबकि एक ने उत्तर प्रदेश गन्ना संघ के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित किया।
ग्रामीण राजनीति की धुरी गन्ना विकास समितियों के चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। 23 सितंबर को मतदाताओं की अनंतिम और 25 सितंबर को अंतिम सूची जारी होगी। इसके साथ ही जनपद की चार गन्ना विकास समितियों और दो चीनी मिल समितियों के चुनाव को लेकर नेताओं ने शतरंज की बिसात बिछानी शुरू कर दी है।
राजनीतिक दलों ने भी गन्ना समितियों में अपने लोगों के जिताने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सहारनपुर गन्ना विकास समिति के अखाडे़ से निकले कई नेताओं ने राजनीति में में बडा मुकाम पाया है। उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य मेलाराम पंवार गन्ना समीति में रहे है। सहारनपुर गन्ना विकास समिति के चेयरमैन रहे चौधरी नकली सिंह दो बार सांसद बने, एक बार उन्होंने बसपा के संस्थापक कांशीराम को चुनाव में हराया था। इसके अलावा पूर्व विधायक महीपाल सिंह माजरा, मसूद अख्तर, हाजी शमशाद और विमला राकेश आदि भी गन्ना विकास समिति में अहम पदों पर रहे थे। इसके साथ ही चेयरमैन रहे चौधरी राजपाल सिंह उत्तर प्रदेश गन्ना संघ के अध्यक्ष पद तक पहुंचे।